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नोटिस मिला तो पता चला उसके नाम पर फर्जी कंपनी

गुरुग्राम का व्यक्ति अब काम के सिलसिले में ऑस्ट्रेलिया में

राष्ट्रीय खबर


 

नईदिल्लीः वर्ष 2018 से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे गुरुग्राम के 25 वर्षीय एक व्यक्ति को 31 मार्च को जीएसटी चोरी के लिए आयकर विभाग से कारण बताओ नोटिस मिला। पुलिस ने सोमवार को बताया कि दिव्यरूप सिंह मान को ईमेल के जरिए भेजे गए नोटिस में 133 करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय लेनदेन का खुलासा हुआ, जिससे दिल्ली में उनके नाम से धोखाधड़ी से संचालित एक शेल कंपनी का पता चला।

पुलिस के मुताबिक, गुरुग्राम के डीएलएफ फेज-5 में वेलिंगटन एस्टेट के निवासी मान जुलाई 2018 में उच्च अध्ययन के लिए कैनबरा चले गए थे। पुलिस ने कहा कि गुरुग्राम में उनका परिवार 31 मार्च को टैक्स नोटिस मिलने पर दंग रह गया। पुलिस ने कहा कि नोटिस में 2019 और 2021 के बीच के लेनदेन के आधार पर जीएसटी चोरी का आरोप लगाया गया है, जिसकी कुल राशि 133 करोड़ से अधिक है।

मामले से अवगत अधिकारियों ने आरोपों का हवाला देते हुए कहा कि 26 फरवरी, 2019 को नई दिल्ली के गुलाबी बाग में पंजीकृत फर्जी फर्म को मान के नाम और पैन विवरण का उपयोग करके बनाया गया था। मान के पिता पुष्पिंदर सिंह ने नोटिस मिलने के बाद मामले की जांच शुरू की।

जांचकर्ताओं ने बताया कि उन्हें पता चला कि कंपनी उनके बेटे की जानकारी के बिना धोखाधड़ी वाली वित्तीय गतिविधियों में लिप्त थी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, जब कंपनी को धोखाधड़ी से बनाया और पंजीकृत किया गया था, तब मान न तो कुछ कमा रहा था और न ही भारत में था।

अधिकारी ने यह भी बताया कि 2018 में ऑस्ट्रेलिया जाने के बाद से मान केवल तीन से चार महीने ही भारत में रहा था। आगे की जांच में पता चला कि फर्जी फर्म खोलने के लिए इस्तेमाल किया गया फोन नंबर और ईमेल पता मान का नहीं था। 2022 के पहले के नोटिस का जवाब न मिलने के बाद आयकर विभाग ने संभवतः उसके ईमेल की तलाश की थी।

मान और उसके पिता ने अप्रैल में दोनों नोटिसों का जवाब दिया और आयकर विभाग को पहचान की चोरी के बारे में बताया। पुलिस के अनुसार, आयकर विभाग मामले की आंतरिक जांच कर रहा है, कारण बताओ नोटिस वापस ले लिया है और मान के नाम से पंजीकृत फर्जी फर्म को आवंटित जीएसटी नंबर रद्द कर दिया है।

जांचकर्ताओं ने बताया कि गुरुग्राम पुलिस आयुक्त को दी गई सिंह की शिकायत को आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को सौंप दिया गया है।

ईओडब्ल्यू की प्रारंभिक जांच के बाद पाया गया कि सिंह के आरोप विश्वसनीय थे। इसके बाद रविवार को सुशांत लोक थाने में आईपीसी की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 419 (छल-कपट), 420 (धोखाधड़ी), 465 (जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) और 471 (धोखे से जाली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को असली के रूप में पेश करना) के तहत अज्ञात संदिग्धों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।