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तेरे दर पे आया हूं.. .. ..

तेरे दर पे सभी को आना पड़ रहा है। हाल ही कुछ ऐसा हो गया है। अब तेरा खौफ का आलम यह है कि बेचारे किरेण रिजिजू साहब निपट गये। पहले ही लोगों ने आगाह किया था कि अगर साहब को माई लॉर्ड के दरबार से डर लगा तो कुछ ना कुछ ऐसा ही होगा। बलि का बकरा बन गये बेचारे।

अब अरविंद केजरीवाल तीसरी बार कब इस दर पर जाते हैं, यह देखने वाली बात होगी क्योंकि यह तो आइने की तरह साफ हो गया है कि आखिर दिल्ली का सारा खेल तो अमित शाह के इशारे पर हो रहा है। अब दिल्ली के उप राज्यपाल और अफसर फिर से सीना ठोंक कर खड़े हो गये हैं कि चुनी हुई सरकार की बात नहीं मानेंगे, देखते हैं कौन क्या कर लेगा।

यह भी भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था का छेद ही है, जिसमें असली नवसामंत वर्ग हर साल यूपीएससी की परीक्षा पास कर निकलते हैं। पावर पूरा है और जिम्मेदारी कुछ भी नहीं। मजे ही मजे हैं, बिल्कुल अंग्रेजों की तरह। कोई एक फंस गया तो बाकी उसे बचाने में जुट जाते हैं।

लेकिन अदालत की शीर्ष पर जो बैठा है, वह क्या और कैसे सोचता है, इसे लेकर मोदी जी परेशान जरूर हैं। वरना किरेण रिजिजू को हटाने के बाद कॉलेजियम की सिफारिश को तुरंत स्वीकार करने का पूर्व रिकार्ड तो नहीं था। अब देखना है कि राहुल गांधी के खिलाफ सजा का एलान करने वाले जज की प्रोन्नति पर क्या फैसला आता है।

लेकिन एगो कंफ्यूजन है कि कुछ अपने ही भाई लोग अचानक से अडाणी को क्लीन चिट मिलने की बात कैसे करने लगे। अदालत में जांच कमेटी ने रिपोर्ट सौंपी है। यह कोई क्लीन चिट तो नहीं है। इससे साफ है कि अब भी हिंडनबर्ग की रिपोर्ट से जिन लोगों के हितों को चोट पहुंची है, वे जनता के सामने खुद  को पाक साफ बताने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। अब देखना है कि इस दर पर राहुल गांधी की मानहानि का मामला कब पहुंचता है और अगर पहुंचता है तो उस पर क्या फैसला आता है।

इसी बात पर अपने जमाने की एक सुपरहिट फिल्म लैला मजनू का यह गीत याद आने लगा है। वैसे तो इस प्रेम कथा पर कई फिल्में बनी थी लेकिन रंगीन फिल्म और उस दौर के सुपरहिट हीरो ऋषि कपूर की वजह से यह फिल्म बहुत अधिक व्यापार कर गयी थी। इस गीत को लिखा था साहिर लुधियानवी ने और संगीत में ढाला था मदन मोहन ने। इसे मोहम्मद रफी ने अपना स्वर दिया था। गीत के बोल कुछ इस तरह हैं।

तेरे दर पे आया हूँ कुछ कर के जाऊँगा

झोली भर के जाऊँगा या मर के जाऊँगा

मैं तेरे दर पे आया हूँ …

तू सब कुछ जाने है हर ग़म पहचाने है

जो दिल की उलझन है सब तुझ पे रौशन है

घायल परवाना हूँ वहशी दीवाना हूँ

तेरी शोहरत सुन सुन के उम्मीदें लाया हूँ

तेरे दर पे, मैं तेरे दर पे आया हूँ …

दिल ग़म से हैराँ है मेरी दुनिया वीराँ है

नज़रों की प्यास बुझा मेरा बिछड़ा यार मिला

अब या ग़म छूटेगा वरना दम टूटेगा

अब जीना मुशकिल है फ़रियादें लाया हूँ

तेरे दर पे, मैं तेरे दर पे आया हूँ …

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी भी इसी दर के सहारे आगे बढ़ रही हैं। वरना ईडी और सीबीआई ने उनके भतीजे की घेराबंदी पूरी कर ली है। अदालत की छांव ना रहे तो भाई लोग अभिषेक का भजिया तल देंगे। गनीमत है कि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बता दिया है कि ईडी के निदेशक को और आगे सेवाविस्तार नहीं दिया जाएगा।

लेकिन कर्नाटक के चुनाव परिणामों से साफ है कि सीबीआई के नये निदेशक प्रवीण सूद उस राज्य सरकार के निशाने पर होंगे। महाराष्ट्र के विधानसभा अध्यक्ष क्या फैसला लेते हैं, उस पर भी माई लॉर्ड की नजर रहेगी, यह तय है क्योंकि अदालत के फैसले पर भी उन्हें विधायकों की अयोग्यता पर फैसला लेना है। अब जब तक टाल सकते हैं, टाल लें लेकिन यही मामला तो झारखंड में भी फंसा है। सिर्फ मुद्दा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का है।

बिहार में जातिगत जनगणना पर अदालत ने रोक लगा दी है। इससे राजनीतिक लाभ किसे होगा, यह समझने वाली बात है। वैसे भी नीतीश कुमार की विपक्षी एकता की गाड़ी चलकर कहां पहुंचती है यह देखने वाली बात होगी। कर्नाटक के शपथ ग्रहण समारोह में कौन कौन नहीं बुलाया गया, यह जगजाहिर है।

अब कौन कौन न्योता मिलने के बाद भी नहीं पहुंचा, यह देखने वाली बात होगी। अब चलते चलते झारखंड की भी बात कर लें कि बिजली और पानी की कमी से हर कोई बेहाल है। अब क्या इन जन समस्याओं को लेकर भी यहां के माई लॉर्ड के दरबार में जाना पड़ेगा। वहां से बुलावा आता है तो सारे हाकिम सीधे हो जाते हैं, वरना उनसे सही जानकारी मिलना भी कठिन है।