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वैज्ञानिक श्री अन्न की पैदावार और उपयोगिता बढ़ायें: मोदी

  • ऐसे मोटे अनाज जल्दी ही तैयार होते हैं

  • जलवायु परिवर्तन के बीच यह एक समाधान

  • लोगों को कई बीमारियों से बचाने में मददगार

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जलवायु परिवर्तन के मद्देनजर और खानपान की शैली के कारण होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए वैज्ञानिकों से श्री अन्न (मोटे अनाजों) की पैदावार तथा उपयोगिता बढ़ाने के लिए प्रयास तेज करने का शनिवार को आह्वान किया।

श्री मोदी ने राजधानी के पूसा स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान में आयोजित ग्लोबल मिलेट्स कांफ्रेंस का उद्घाटन करते हुए कहा कि विश्व जहां जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से जूझ रहा है वहीं श्री अन्न विपरीत जलवायु और कम पानी में बेहतर पैदावार देते हैं। रसायन के बिना प्राकृतिक तरीके से भी मोटे अनाजों की पैदावार ली जा सकती है।

मोटे अनाजों की फसल अन्य फसलों की तुलना में जल्दी तैयार होती है। इसकी क्षति भी कम होती है और स्वाद में विशिष्टता इसे खास पहचान दिलाती है। खान-पान की शैली से होने वाली बीमारियों को मोटे अनाजों को भोजन का हिस्सा बनाने से रोका जा सकता है। इन अनाजों में रेशे की मात्रा अधिक होती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि चिंता की बात यह है कि खान-पान में मोटे अनाजों का हिस्सा पांच-छह प्रतिशत ही है। इसका उपयोग बढ़े, इसके लिए हर वर्ष इसका लक्ष्य निर्धारित करना होगा। वैज्ञानिकों को इस पर ध्यान देना होगा। कई राज्यों ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली में श्री अन्न को शामिल किया गया है और मिड-डे मील में इसे शामिल किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि ‘ग्लोबल फूूड सिक्यूरिटी’ को लेकर विश्व चिंतित है और मोटे अनाजों को लेकर एक नयी व्यवस्था कायम करने तथा दुनिया में आपूर्ति चेन को विकसित करने की जरूरत है। श्री मोदी ने कहा कि मोटे अनाज सदियों से भारतीय जीवन शैली का हिस्सा रहे हैं और श्री अन्न के मामले में भारत अग्रणी रहा है।

वह इस मामले में अपने अनुभवों को विश्व के साथ साझा करना चाहता है और दुनिया से सीखना भी चाहता है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण, प्रकृति, स्वास्थ्य और किसानों की आय मोटे अनाजों से जुड़े हैं। श्री अन्न से मोेटे अनाजों को एक नयी पहचान मिली है, यह समग्र विकास का माध्यम बना है तथा यह गांव-गरीब से जुड़ा है और छोटे किसानों की समृद्धि का द्वार है।

आज भी आदिवासी समाज के सत्कार में यह शामिल है। उन्होंने कहा कि 12-13 राज्यों में मोटे अनाजों की खेती होती है और घरेलू खपत इसकी प्रतिमाह दो से तीन किलोग्राम थी जो अब बढ़कर 14 किलोग्राम हो गयी है। उन्नीस जिलों में यह ‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजना में शामिल है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मोटे अनाजों को छोटे किसान उगाते हैं जिनकी संख्या देश में लगभग ढाई करोड़ है। सरकार ने ऐसे किसानों की सुध ली है। श्री अन्न का बाजार बढ़ेगा तो किसानों की आय बढ़ेगी और इससे गांवों को फायदा होगा। देश में 500 से ज्यादा श्री अन्न स्टार्ट-अप बने हैं और स्वयं सहायता समूह के माध्यम से महिलायें मिलेट्स के उत्पाद बना रही हैं।

इससे पूर्व कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि श्री मोदी वर्षा आधारित खेती करने वाले छोटे किसानों की ताकत बढ़ाना चाहते हैं। श्री मोदी ने इस अवसर पर एक डाक टिकट और 75 रुपये का एक विशेष सिक्के का अनावरण भी किया। यह सम्मेलन दो दिनों तक चलेगा। इसमें कई देशों के कृषि मंत्री और कृषि से संबंधित विभागों के मंत्री शामिल हो रहे हैं। श्री मोदी ने इस मौके पर मोटे अनाजों पर आधारित एपीडा की ओर से लगायी गयी एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया।