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बुरहानपुर के ऐतिहासिक धरोहर बयां करेंगे अपनी हकीकत, QR कोड स्कैन करते ही मिलेगा पूरा इतिहास

बुरहानपुर: आमतौर पर पर्यटकों को किसी भी ऐतिहासिक धरोहर के इतिहास को जानने के लिए पर्यटकों को गाइड की जरूरत पड़ती हैं, ऐसे में बुरहानपुर जिला प्रशासन ने ऐतिहासिक धरोहरों को बढ़ावा देने के मकसद ने बड़ा फैसला लिया है. जिले के दर्जनों ऐतिहासिक धरोहरों के इतिहास की जानकारी पर्यटकों को आसानी से मुहैया कराने के लिए प्रशासन ने प्लान तैयार किया है. कलेक्टर हर्ष सिंह ने पर्यटन विकास की अपार संभावनाओं को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत की है.

ऐतिहासिक स्थलों पर लगाए गए क्यूआर कोड

हाल ही में कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला पुरातत्व, पर्यटन और संस्कृति परिषद की बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में ऐतिहासिक धरोहरों के विकास, संरक्षण और बेहतर प्रबंधन को लेकर सराहनीय कदम उठाया है. कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को ऐतिहासिक धरोहरों, इमारतों और पर्यटन स्थलों पर क्यूआर स्कैनर (QR Scanner) चिपकाने के निर्देश दिए हैं, ताकि पर्यटकों को इस क्यूआर कोड को स्कैन के बाद संबंधित स्थल की सटीक जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सके. इसके अलावा उन्होंने जिले की एनआईसी वेबसाइट को अपडेट और पर्यटन संबंधित मोबाइल एप को दोबारा सक्रिय करने के निर्देश भी जारी किए हैं.

पर्यटकों की सुविधाओं का रखा जाएगा ख्याल

बैठक में पर्यटन स्थलों तक पहुंचने के लिए एप्रोच रोड, जरूरी मूलभूत सुविधाएं, सुरक्षा व्यवस्था सहित पर्यटकों से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर प्लान तैयार किया है. इस दौरान कलेक्टर ने अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा ऐतिहासिक शाही किला में लगाए गए लाइट एंड शो सिस्टम से स्कूल व कॉलेज के छात्र-छात्राओं को अवगत कराया जाए, ताकि युवा पीढ़ी जिले के गौरवशाली इतिहास से परिचित हो सकें. इन ऐतिहासिक धरोहरों को लेकर कार्ययोजना तैयार की गई है.

टूरिज्म फैसिलिटेशन सेंटर होगा स्थापित

काला ताजमहल तक पहुंच मार्ग के निर्माण के लिए सहमति बनी है. वही असीरगढ़ किला में शौचालय, पार्किंग ब्लॉक, बिजली व्यवस्था, इलेक्ट्रिक वाहनों सहित अन्य मूलभूत सुविधाएं विकसित करने के निर्देश भी दिए हैं. साथ ही पर्यटन स्थलों की वृद्ध स्तर पर ब्रांडिंग पर भी विशेष जोर दिया है. इसके अलावा बुरहानपुर में टूरिज्म फैसिलिटेशन सेंटर स्थापित किए जाने की बात कही है. इसी तरह बुरहानपुर उत्सव और रहीम उत्सव जैसे आयोजनों के लिए भी विस्तारपूर्वक चर्चा की गई. इस दौरान डीएटीसीसी के सदस्यों ने भी अपने सुझाव दिए हैं.

पर्यटकों ने की क्यूआर कोड की तारीफ

इंदौर से आए पर्यटक आलम खान ने बताया कि “जिला प्रशासन की पहल से आम पर्यटकों को ऐतिहासिक इतिहास जानने में आसानी होगी. यह पहल न सिर्फ सुविधाजनक व्यवस्था है, बल्कि धरोहरों को डिजिटलाइजेशन से जोड़ने में महत्वपूर्ण फैसला है. अब पर्यटक बिना गाइड की सहायता से गौरवशाली इतिहास से रूबरू होंगे. अब पर्यटकों को अपने मोबाइल स्क्रीन पर इतिहास की जानकारी मिल रही है.”

नेपाल से आए पर्यटक नाजिर हुसैन ने बताया कि “बुरहानपुर ऐतिहासिक नगरी के नाम से प्रसिद्ध है. यहां दर्जनों ऐतिहासिक धरोहरें मौजूद हैं. इसके इतिहास की जानकारी मुहैया कराने के लिए प्रशासन का फैसला तारीफे काबिल है. प्रशासन द्वारा क्यूआर कोड का निर्णय बेहद सुविधाजनक साबित होगा.