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दिल्ली के दंगल में भाजपा को नुकसान ही नुकसान

दिल्ली के मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव हो चुका है। यह चुनाव भी शायद नहीं हो पाता अगर सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में दो स्पष्ट बातें नहीं कही होती। दिल्ली के उप राज्यपाल वीके सक्सेना कानूनी प्रक्रियाओं को नहीं जानते हैं, ऐसा सोचना संभव नहीं है क्योंकि उन्हें प्रशासनिक काम काज का लंबा अनुभव है।

इसके बाद भी मनोनित पार्षदों को मतदान का अधिकार उनके स्तर पर कैसे लिया गया अथवा उनके द्वारा नियुक्त पीठासीन अधिकारी ने ऐसा क्यों किया, यह समझ से परे नहीं बल्कि साफ साफ राजनीतिक हस्तक्षेप का सबूत है।

भाजपा के पास दिल्ली नगर निगम में स्पष्ट बहुमत नहीं है। इसलिए जब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चुनाव हुआ तो पहले दोनों पदों पर भाजपा के प्रत्याशी पराजित हो गये। अब उसके बाद से स्टैंडिंग कमेटी का चुनाव में बार बार हंगामा हो रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम के जो वीडियो सामने आये हैं, उससे साफ है कि भाजपा के पार्षदों को कहीं से यह निर्देश प्राप्त हो रहा है कि किसी भी कीमत पर इस चुनाव को नहीं होने देना है। दूसरे शब्दों में यह साफ है कि भाजपा दो चुनाव हार जाने के बाद अब दिल्ली नगर निगम के स्टैंडिंग कमेटी का चुनाव बाधित कर रही है।

स्टैंडिंग कमेटी के चुनाव में भाजपा का जीतना इसलिए जरूरी है क्योंकि आप ने छह पद पर चार प्रत्याशी उतार रखें हैं, जबकि भाजपा ने तीन प्रत्याशी उतार रखें है। भाजपा अगर सदन से तीन प्रत्याशी जीतती है तो वह स्थायी समिति के अध्यक्ष के लिए लड़ाई में आ जाएगी।

इसलिए आप की कोशिश चार पदों को जीतने की है और भाजपा की कोशिश तीन पदों पर जीतने की है। लेकिन जो कुछ नजर आ रहा है उससे साफ है कि भाजपा अब नगर निगम चुनाव में भी अपनी हार को स्वीकार नहीं कर पा रही है। उसे अपने राजनीतिक भविष्य पर खतरा मंडराता दिख रहा है।

देश की सबसे नई पार्टी ने जिस तरीके से राजनीति के मैदान में अपना विस्तार किया है और जिस तरीके से उसकी लोकप्रियता का ग्राफ ऊपर जा रहा है, उससे दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली भाजपा के लिए चिंता स्वाभाविक है।

लेकिन यह बात स्वाभाविक नहीं है कि इसके लिए इस तरीके से चुनाव को बाधित किया जाए। असली सवाल इसी चुनाव को बाधित करने का है। मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव खत्म होने के बाद कल ही स्टैंडिंग कमेटी के चुनाव की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गयी थी।

रात भर पार्षद वहां जमे रहे और जब कभी चुनाव के लिए मतदान कराने की कोशिश हुई, भाजपा पार्षदों की तरफ से हंगामा किया गया। इस बीच कई बार बैलेट बॉक्स भी छीनने की कोशिश हुई। आज सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होते ही आप के पार्षद वोट कराने को लेकर नारेबाजी करने लगे।

वहीं, भाजपा के पार्षद भी मेयर के आसन के सामने पहुंच गए। इसके बाद सदन की बैठक को शुक्रवार सुबह दस बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू होती है वैसे पार्षदों का हंगामा शुरू हो जाता है। कल रात पार्षदों के बीच हाथापाई हुई और बोतलें फेंकी गईं और आज सुबह से सदन में कागज के गोले फेंके गए।

इस दौरान महिला पार्षद भी आपस में भिड़ती नजर आईं। फिर हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। भाजपा पार्षद स्थायी समिति के सदस्यों के चुनाव फिर से कराने की मांग पर अड़े रहे। हंगामे को लेकर एडिशनल डीसीपी शशांक जायसवाल ने सिविक सेंटर का दौरा किया।

नवनिर्वाचित मेयर शैली ओबराय ने कहा कि सदन में मर्यादा का पालन नहीं हुआ है। रेखा गुप्ता ने पोडियम तोड़ा और अमित नागपाल ने बैलेट पेपर फाड़ा। इसलिए रेखा गुप्ता और अमित नागपाल पर कार्रवाई करेंगे। एक घंटे स्थगित रहने के बाद हंगामे के बीच फिर से सदन की कार्यवाही शुरू हो गई है।

वोट कराने के लेकर आप के पार्षद नारेबाजी कर रहे हैं। वहीं, भाजपा के पार्षद भी महापौर के आसन के सामने पहुंचे। इसके बाद सदन की बैठक कल यानी शुक्रवार सुबह दस बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

अब भाजपा इस बात को शायद समझना नहीं चाहती है कि इस किस्म के हंगाम से उसका अपना जनाधार हर रोज घटता जा रहा है। आम मतदाता अपने फैसले के इस किस्म के अनादर को अच्छी नजरों से नहीं देखेगी, यह भारत का स्वभाव है। दिल्ली नगर निगम का कार्यकाल मात्र चार महीनों का है।

इसलिए अगले चुनाव में आम जनता ऐसे दृश्यों को देखकर क्या फैसला लेगी, यह भाजपा के लिए और बड़ी चिंता का विषय है। हो सकता है कि इस बीच दिल्ली नगर निगम के वैसे राज भी खुल जाएं, जिस पर भाजपा ने अब तक पर्देदारी की है। लेकिन इन तमाम घटनाक्रमों से भाजपा दिल्ली की जनता को नाराज कर रही है, यह बात सबसे महत्वपूर्ण है।