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योजना मद का आधा ही खर्च होगा झारखंड के लिए धोखा हैः नायक

रांचीः चालू वित्तीय वर्ष के 31 जनवरी 2023 तक मात्र 53 फीसदी ही योजना मद व्यय राशि में खर्च होना झारखंडी समाज के साथ धोखा करना है । उपरोक्त बातें आज झारखंडी सूचना अधिकार मंच के केंद्रीय अध्यक्ष सह हटियाविधान क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी विजय शंकर नायक ने कही ।

इन्होने यह भी कहा कि महज 51 दिन में बाकी 27 हजार करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च करना एक बड़ी चुनौती है । श्री नायक ने आगे कहा कि वित्तीय वर्ष 2022-23 की समाप्ति में अब महज 51 दिन बचे हैं। तीन मार्च को अगले वित्तीय वर्ष का बजट सरकार पेश करने जा रही है।

चालू वित्तीय वर्ष के बजट की बात करें तो योजना व्यय में से 31 जनवरी 2023 तक 53 फीसदी ही राशि खर्च हो पाये हैं। जबकि 47 फीसदी राशि अभी भी विभिन्न विभागों के पास पड़े हुए हैं। सरकार के लिए शेष बचे हुए दिनों में 27 हजार करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च करना एक बड़ी चुनौती होगी और खर्च भी किये जाने का प्रयास किया गया तो वह मार्च लुट होगा ।

इन्होने आगे यह भी बताया कि विभागवार अगर देखा जाये तो कृषि विभाग का परफॉरमेंस सबसे खराब रहा है , कृषि विभाग ने अब तक योजना मद की राशि में से मात्र 16.32 प्रतिशत ही खर्च कर पाया है वहीं, ग्रामीण विकास विभाग 35 फीसदी राशि ही खर्च की है।

ग्रामीण विकास विभाग,ग्रामीण कार्य और पंचायती राज विभाग मिलाकर ग्रामीण क्षेत्रों में 11900 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान रखा गया है जिसमें से अभी तक 4113.26 करोड़ यानि 34.57 फीसदी राशि खर्च किया जा सका है जो कृषि कर जीवन यापन करने वाले किसान भाइयों एवं ग्रामीण क्षेत्र मे रहने वाले झारखंडी समाज के लोगो कि विकास की बात सरकार के द्वारा बात करना बेमानी है ।

श्री नायक ने यह भी बताया कि कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में झारखंड काफी पिछड़ा हुआ है , राज्य में कृषि पर 290.36 करोड़ जिसमें अभी 367.25 करोड़, पशुपालन में 140.00 करोड़ के बजट से 41.60 करोड़, दुग्ध में 114.14 करोड़ में से 45.65 करोड़, मत्स्य में 154.50 करोड़ में 37 करोड़ व सहकारिता में 290.00 करोड़ में से मात्र 95.81 करोड़ रुपये ही खर्च हुए।

कृषि,पशुपानन,दुग्ध, मत्स्य व सहकारिता का पूरा बजट मिलाकर 3600 करोड़ का है जिसमें से अब तक 587.39 करोड़ ही खर्च किए जा सके हैं जो राज्य हित एंव ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले झारखंडी समाज के हित में नही है और हेमंत सरकार नही चाहती कि झारखंड के गरीब कृषक परिवार एंव ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले झारखंडी समाज का विकास हो ।