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जर्मन टैंक आने पर पुतिन ने दूसरे विश्वयुद्ध की याद दिलायी

कियेबः रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन ने फिर से परमाणु हथियार की बात कही है। इससे पहले भी वह कई बार इसकी चर्चा कर चुके हैं लेकिन अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ मानते हैं कि फिलहाल रूस का परमाणु हथियार इस्तेमाल करने का कोई इरादा और तैयारी दोनों नहीं है।

पुतिन ने जर्मनी द्वारा यूक्रेन में भेजे जाने वाले टैंकों के संदर्भ में बात करते हुए कहा कि दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान भी नाजियों ने रूस पर टैंक से हमला किया था। उनका अंतिम नतीजा क्या हुआ, यह इतिहास के पन्नों में दर्ज है। नाजियों का उल्लेख रूसी राष्ट्रपति ने इसलिए भी किया क्योंकि वह पहले ही यह आरोप लगा चुके हैं कि यूक्रेन में भी नाजीवाद पनप रहा है।

इसी वजह से रूसी समुदाय के हितों की रक्षा के लिए रूस को आगे आना पड़ा है। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान रूस के स्टालिनग्राड पर भी हिटलर की सेना ने टैंक से हमला किया था। जिसके बाद अंततः वहां की हार की वजह से पूरी दुनिया में हिटलर की सेना पराजित हो गयी थी।

पुतिन ने कहा है कि हम अपने पड़ोस मे किसी किस्म की चुनौती नहीं चाहते हैं। जो जानबूझकर ऐसी चुनौती खड़ी कर रहे हैं, वे इसकी कीमत भी अदा करेंगे। वरना रूस की सीमा से सटे कई देश बड़ी आराम से हैं और उन्हें रूस से कोई परेशानी भी नहीं है।

पुतिन ने कहा कि नाजी सेना को परास्त करने के वक्त भी साढ़े सात लाख रूसियों ने कुर्बानी दी थी। उन्होंने कहा कि हमारी सीमा में जर्मनी हो अथवा किसी दूसरे देश का टैंक लेकर कोई आया तो वह इसका परिणाम खुद भुगतेगा। उन्होंने कहा कि बहुत सारे देशों को दूसरे विश्वयुद्ध के वक्त भी लगा था कि जर्मनी से कोई जीत नहीं सकता लेकिन बाद में क्या हुआ, यह सभी को पता है।

पुतिन ने कहा कि अब हमारे युद्ध का तरीका बदल गया है। इसलिए हम अपने टैंकों को दूसरे देश की सीमा पर नहीं भेजते। ऐसे सैन्य हथियारों को बैठे बैठे खत्म करने की तकनीक रूस के पास है। इस बयान से ही स्पष्ट हो गया कि दरअसल ब्लादिमीर पुतिन रूसी परमाणु हथियारों की चर्चा कर रहे थे।

वाकई रूस के पास ऐसे हथियार पर्याप्त संख्या में हैं, जिससे दूसरे देश भी इंकार नहीं करते हैं। यूक्रेन में नाजीवाद पनपने के उनके बयान को कूटनीतिक तौर पर दूसरे तरीके से लिया जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की मूल रूप से यहुदी परिवार से हैं और उनके परिवार के कई लोग नाजियों के हाथ मारे गये थे।