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सैन्य शासन के बाद अफीम की खेती बहुत अधिक बढ़ी

  • भारतीय सुरक्षा बलों के लिए चुनौती

  • मादक पदार्थों के तस्करों की अब चांदी

  • मजबूरी मे किसान भी उसी तरह चले गये

राष्ट्रीय खबर

अगरतलाः भारत के लिए म्यांमार की स्थिति अधिक परेशानी वाली बात है। इनदिनों भारतीय सीमा में जो मादक पदार्थ लाये जा रहे हैं, उनका अधिकांश हिस्सा म्यांमार से ही आ रहा है। दोनों देशों की सीमा पर ऐसे अनेक इलाके हैं, जहां जंगल के रास्ते मादक पदार्थो के तस्कर आसानी से माल भारत में पहुंचा रहे हैं।

दूसरी तरफ पहली बार संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में इस बात को स्वीकार किया गया है कि वहां सैन्य शासन कायम होने की बाद ही दूरस्थ इलाकों में अफीम की खेती अत्यधिक बढ़ गयी है। वैसे संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में यह कहा गया है कि राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता की वजह से भी अनेक लोग अब अफीम की खेती के प्रलोभन में फंसने पर विवश हुआ है। अफीम के सौदागर उन्हें इसके एवज में अच्छी खासी रकम दे रहे हैं।

अपना परिवार पालने की जिम्मेदारियों की वजह से दूरस्थ इलाकों के किसान अब जंगल के बीच बने खेतों में अफीम की ही खेती करने लगे हैं। फरवरी 2021 में तख्ता पलट के कर सैन्य शासकों के सत्ता पर आसीन होने के बाद देश की हालत दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। दूसरी तरफ भारत की परेशानी यह है कि म्यांमार से उसकी सीमा पर हर स्थान पर आने जाने पर रोक लगाना संभव नहीं है।

अनेक जंगलों और पहाड़ों से होकर गुजरने वाले इस सीमा पर कहां से भारत आया जा सकता है, इसकी जानकारी मादक पदार्थों के तस्करों को बेहतर है। इसी क्रम में अब हथियारों और अन्य राष्ट्र विरोधी सामानों की तस्करी भी बढ़ती जा रही है। अनुमान है कि सैन्य अधिकारियों द्वारा जबरन सत्ता हथियार को पहले करीब चालीस हजार हेक्टयर में अफीम की खेती होती थी।

अब यह बढ़ गया है। इसी वजह से देश में अफीम का उत्पादन भी लगभग दो गुणा हो चुका है। मादक पदार्थों के अंतर्राष्ट्रीय तस्कर गिरोहों के लिए म्यांमार में अफीम उगाने के लिए पूंजी निवेश किया जा रहा है। दूसरी तरफ सैन्य सरकार अपने विद्रोहियों से लड़ने में ही व्यस्त है और देश के अंदर हो रही इस खेती को रोकने की दिशा में उसकी तरफ से कोई पहल नहीं हो रही है। इस वजह से म्यांमार सीमा पर तैनात भारतीय सुरक्षा बलों की चुनौतियां दिनोंदिन बढ़ती जा रही है।