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भाजपा शासित राज्यों के लिए क्या फिर से नियम बदलेगा

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः जीएसटी में कंपनसेशन देने की अवधि समाप्त हो चुकी है। इसके तहत जो राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले हैं, उनके लिए केंद्र सरकार क्या फैसला लेती है, इस पर आर्थिक विशेषज्ञों का ध्यान है। वैसे भरपाई करने की अवधि तो पिछले वर्ष जून में ही समाप्त हो गयी थी।

उस वक्त पूरा देश कोरोना लॉकडाउन से उपजी मंदी की चपेट में था। अब एक रिपोर्ट सामने आयी है जिसमें बताया गया है कि कई राज्यों को मिलने वाले कंपनशेसन का औसत वहां के कर औसत के दस प्रतिशत से अधिक हो चुका है। इसलिए पूर्व निर्धारित नियमों के तहत उन्हें अब पैसे नहीं मिलेंगे।

जीएसटी पर पहले से लिये गये इस फैसले से कमसे कम दस राज्य प्रभावित होंगे। इनमें कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तराखंड भी शामिल हैं। इन सभी में अभी भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। ऐसे में केंद्र सरकार अपनी लोकप्रियता और आगामी लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए क्या फैसला लेती है, इस पर नजर है।

वैसे यह स्पष्ट है कि नियमों में छूट किसी एक राज्य के लिए नहीं दी जा सकती है। वैसे भी गैर भाजपा शासित कई राज्य बार बार यह आरोप लगा रहे हैं कि केंद्र ने जीएसटी में इन राज्यों को उनका समुचित हिस्सा नहीं दिया है। इन राज्यों में झारखंड भी शामिल है।

समझा जा रहा है कि इस नियम के लागू होने से पुदुचेरी, पंजाब, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, गोवा और उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था पर सबसे बुरा असर पड़ेगा क्योंकि इन सभी राज्यों का जीएसटी कंपनशेसन दस प्रतिशत की सीमा को पार कर चुका है।

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है। वैसे जीएसटी के इन नये प्रावधानों से पूर्वोत्तर के राज्यों को सबसे अधिक फायदा हुआ है। राष्ट्रीय औसत 14.8 प्रतिशत के मुकाबले इन राज्यों को 27.5 प्रतिशत कर का हिस्सा मिला है। जीएसटी को लागू किये जाते वक्त यह तय किया गया था कि सभी राज्यों को 30 जून 2022 तक यह भरपाई मिलती रहेगी।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पिछले माह ही कहा था कि झारखंड को अभी राजस्व के मद में पांच हजार करोड़ का नुकसान हो रहा है। इसलिए उन्होंने झारखंड के लिए छूट की मांग की थी। दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने कहा था कि अगर इसे रोका गया तो राज्य को तीन हजार करोड़ का वार्षिक नुकसान होगा। दिल्ली सरकार का दावा है कि इस कंपनसेशन को रोकने से उन्हें भी वार्षिक आठ हजार करोड़ का घाटा होगा।

इसका आकलन करते हुए जीएसटी काउंसिल ने इसकी अवधि मार्च 2026 तक बढ़ाते हुए यह शर्त लगायी थी कि इस पैसे का उपयोग सिर्फ पहले लिये गये कर्ज की अदायगी के लिए किया जाएगा। यानी राज्यों को इसका कोई लाभ नहीं मिलेगा।

कोरोना लॉकडाउन से पूरी स्थिति की गड़बड़ा गयी और केंद्र सरकार भी राज्यों को उनका बकाया देने की स्थिति में नहीं थी। अब स्थिति में सुधार के बाद भी सभी राज्यों की स्थिति कोरोना के पहल से और बेहतर होने में अभी समय लगेगा। ऐसी स्थिति मे कई राज्यों के विधानसभा चुनाव करीब आने के मौके पर केंद्र सरकार इस पर क्या कार्रवाई करती है, इसी पर आर्थिक विशेषज्ञों का ध्यान अटका हुआ है।