Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Defence Production: भारत के रक्षा उत्पादन ने छुई नई ऊंचाई; 1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा ... Regional Parties vs Congress: क्षेत्रीय दलों में टूट का किसे मिलेगा फायदा? भारतीय राजनीति में कांग्र... Political Shift in India: INDIA गठबंधन को बड़ा झटका; टीएमसी और शिवसेना (UBT) में टूट के बाद NDA हुआ औ... Shiv Sena UBT Crisis: संजय राउत ने बागियों को दी चेतावनी; कहा- 'इस्तीफा देकर जाएं, कार्यकर्ताओं के ख... Ayodhya Ram Mandir: दानपात्र गबन मामले पर बृजभूषण शरण सिंह का बड़ा बयान; कहा- 'बिना धुएं के आग नहीं न... Jaipur Fire Accident: पटाखा फैक्ट्री अग्निकांड का मुख्य आरोपी कय्यूम खान गिरफ्तार; कचरा बीनकर बिता र... Greater Noida Police: सूर्य ग्लोबल कंपनी में शर्मनाक वारदात; दो आरोपी गिरफ्तार, ICU में भर्ती है पीड़... Regional Parties vs Congress: क्षेत्रीय दलों में टूट का किसे मिलेगा फायदा? भारतीय राजनीति में कांग्र... NEET Exam Tension: डॉक्टर बनने का सपना अधूरा; अलवर की छात्रा रेणु मीणा ने दी जान, इलाके में शोक की ल... Bihar News: छपरा-हाजीपुर फोरलेन का अधूरा पुल; 15 वर्षों से निर्माणाधीन, अब 40 करोड़ के नए ठेके से जग...

शीर्ष अदालत ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बड़ी राहत दी

  • मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ का फैसला

  • सीएम की तरफ से कपिल सिब्बल ने बहस की

  • केंद्रीय एजेंसियों की जांच पर कोई अदालती रोक नहीं

नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को मनी लॉन्ड्रिंग और खनन पट्टा हासिल करने के आरोपों पर सोमवार को राहत का फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश यू यू ललित और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने मुख्यमंत्री सोरेन को उनकी और राज्य सरकार की अपील पर राहत दी।

पीठ ने मुख्यमंत्री सोरेन पर मुखौटा (शेल) कंपनियों के सहारे मनी लॉन्ड्रिंग और खुद के लिए एक खनन पट्टा हासिल करने के आरोपों के संबंध में दायरा जनहित याचिकाओं को सुनवाई योग्य करार देने के झारखंड उच्च न्यायालय के एक फैसले को सोमवार को रद्द कर दिया। शीर्ष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ की ओर न्यायमूर्ति धूलिया ने यह फैसला सुनाया।

झारखंड सरकार और मुख्यमंत्री सोरेन ने जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करने के उच्च न्यायालय के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी। अपील पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मूल याचिकाकर्ता शिव शंकर शर्मा के आचरण पर सवाल उठाया था। उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील करने वाले श्री सोरेन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने तर्क दिया कि इस मामले में उच्च न्यायालय की प्रथम दृष्टया संतुष्टि नहीं है।

दूसरी ओर, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने तर्क दिया कि तकनीकी आधार पर आपराधिक याचिकाओं को खारिज नहीं किया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने श्री सोरेन के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर उच्च न्यायालय के समक्ष चल रही सुनवाई पर 17 अगस्त को रोक लगा दी थी, जिसमें मुख्यमंत्री सोरेन पर शेल कंपनियों के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग और खुद सहित खनन पट्टे देने में अनियमितता का आरोप लगाए गये थे।

शीर्ष अदालत ने खनन पट्टा देने, मनरेगा घोटाले के आरोपों और शेल कंपनियों में धन के हस्तांतरण के संबंध में मुख्यमंत्री सोरेन के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई ) और प्रवर्तन निदेशालय ( ईडी) से जांच की मांग करने वाली तीन जनहित याचिकाओं की सुनवाई योग्यता पर फैसला करने का निर्देश दिया था। शीर्ष अदालत ने यह निर्देश उच्च न्यायालय को 23 मई को दिया था। उच्च न्यायालय ने तीन जून को श्री शर्मा द्वारा दायर दो याचिकाओं को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया था।

इन याचिकाओं में मुख्यमंत्री सोरेन और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ सीबीआई और ईडी द्वारा जांच की मांग की गई थी। उच्च न्यायालय के समक्ष जनहित याचिकाओं में से एक में ईडी को 2010 में मनरेगा फंड के वितरण से उत्पन्न कथित अपराधों से संबंधित 16 प्राथमिकियों की जांच के लिए निर्देश देने की गुहार लगाई गई थी। दूसरी याचिका में, मुख्यमंत्री सोरेन के परिवार द्वारा कुछ कंपनियों में धन के कथित हस्तांतरण की जांच की मांग की की गई थी। तीसरी जनहित याचिका में मुख्यमंत्री के अपने नाम से खनन पट्टे प्राप्त करने के लिए मुकदमा चलाने की मंजूरी देने की मांग की गई थी।

प्रवर्तन निदेशालय ने पहले दावा करते हुए कहा था कि भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी पूजा सिंघल की गिरफ्तारी के बाद उनके पास से बरामद सामग्री का राजनीतिक उच्चाधिकारियों से सीधा संबंध है। सिंघल राज्य में खान और भूविज्ञान विभाग के सचिव और झारखंड राज्य खनिज विकास निगम लिमिटेड (जेएसएमडीसी) की प्रबंध निदेशक थीं। ईडी ने 11 मई को उन्हें गिरफ्तार किया था और अगले दिन12 मई को झारखंड सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था।