देश की दो बड़ी रेल दुर्घटनाओँ की नैतिक जिम्मेदारी ली
मैड्रिडः यूरोपीय देश स्पेन की राजधानी और राजनीतिक गलियारों में उस समय भूचाल आ गया जब देश के परिवहन मंत्री ऑस्कर पुएंते ने अपने पद से इस्तीफा देने की आधिकारिक घोषणा कर दी। यह फैसला स्पेन के आधुनिक इतिहास के सबसे भीषण और दर्दनाक ट्रेन हादसों में से एक के ठीक बाद आया है। नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मंत्री ने न केवल अपने पद से त्यागपत्र दिया है, बल्कि आगामी आम चुनाव की चुनावी दौड़ से भी पूरी तरह अपना नाम वापस ले लिया है, जिससे देश की राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
संसद को मंगलवार को संबोधित करते हुए एक भावनात्मक और गंभीर बयान में पुएंते ने स्पष्ट किया कि उन्होंने पिछले सप्ताह हुए इस हादसे के घटित होने के तुरंत बाद ही अपने पद से इस्तीफा देने का पक्का मन बना लिया था। हालांकि, संकट की इस घड़ी में शुरुआती राहत कार्यों, घायलों के उपचार, और सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए वे कुछ दिनों तक अपने पद पर बने रहे ताकि स्थिति को संभाला जा सके।
मध्य स्पेन के कास्टिला-ला मांचा क्षेत्र में हुए इस भयानक रेल हादसे में कम से कम 69 मासूम लोगों की जान चली गई, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। यह बेहद चिंताजनक बात है कि एक साल से भी कम के अंतराल में स्पेन में हुआ यह दूसरा सबसे बड़ा और विनाशकारी ट्रेन हादसा है।
पुएंते ने अपने इस्तीफे का बचाव करते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि स्पेन जैसे विकसित और जिम्मेदार लोकतांत्रिक देश का कोई भी परिवहन मंत्री महज एक साल के भीतर इस स्तर की दो अत्यंत गंभीर रेल दुर्घटनाएं होने के बाद अपने पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार खो देता है। उन्होंने इसी वर्ष जनवरी के महीने में अंडालूसिया में हुई उस हाई-स्पीड ट्रेन दुर्घटना का भी विशेष रूप से जिक्र किया जिसमें 46 यात्रियों की मौत हो गई थी।
प्राथमिक तकनीकी जांच और रिपोर्ट के अनुसार, जिस दिन यह हादसा हुआ, उस दिन मैड्रिड-सेविले मुख्य रेल लाइन पर एक तकनीकी सिग्नल की अचानक बड़ी खराबी आ गई थी, जिसके कारण सुरक्षा के मद्देनजर पटरियों के एक विशेष हिस्से पर सभी ट्रेनों को तुरंत रोकने का कड़ा आदेश जारी किया गया था।
हालांकि, सिग्नल की इस विफलता के बाद जब मैड्रिड में बैठे केंद्रीय नियंत्रकों ने कमान अपने हाथों में ली, तो कथित तौर पर बड़ी लापरवाही बरतते हुए सरकारी कंपनी रेनफे की एक तेज रफ्तार हाई-स्पीड यात्री ट्रेन को आगे अपनी यात्रा जारी रखने की अनुमति दे दी गई। इस घातक प्रशासनिक और तकनीकी चूक का परिणाम यह हुआ कि वह ट्रेन उसी ट्रैक पर आगे जाकर खड़ी निजी कंपनी आईरो की एक अन्य ट्रेन से जोरदार गति से जा टकराई, जिससे यह भीषण राष्ट्रीय त्रासदी घटित हुई। इस हादसे ने देश की रेलवे सुरक्षा प्रणालियों, सिग्नलिंग नेटवर्क और एयर ट्रैफिक व ट्रेन कंट्रोल मैनेजमेंट की कार्यप्रणाली पर गंभीर और गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।