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राम मंदिर चंदा चोरी मामले से शीर्ष अदालत ने पल्ला झाड़ा

यूपी सरकार के आरोप पत्र पर याचिकाएं निष्पादित

सीबीआई की जांच अब नहीं होगी

पहले ही संदेह जताया गया था

सिर्फ आठ लोगों पर कार्रवाई हुई

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीःउत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अपने विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा आरोप पत्र दाखिल किए जाने की जानकारी देने के बाद, सर्वोच्च न्यायालय ने राम मंदिर दान गबन मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो जांच की मांग वाली याचिकाओं का निपटारा कर दिया। भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने आगे की न्यायिक जांच से इनकार कर दिया, हालांकि सॉलिसिटर-जनरल तुषार मेहता ने प्रस्तुत किया कि पैसों की गिनती के दौरान हेराफेरी हुई थी और आरोपी व्यक्तियों द्वारा उस राशि को संपत्ति में निवेश किया गया था।

अपने आदेश में, शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ताओं (जिनमें श्री राम जन्मभूमि केस ट्रस्ट, अजय कुमार राय, नरेंद्र कुमार गोस्वामी और सुधारक सिंह आदि शामिल हैं) को आगे की कार्यवाही में निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) की सहायता करने की अनुमति दी। पीठ ने तर्क दिया कि वे अपराध के पीड़ितों के रूप में सहायता कर सकते हैं, क्योंकि मामला जनहित के मुद्दों से जुड़ा हुआ है।

सीबीआई जांच की याचिका के अलावा, याचिकाकर्ताओं ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर में प्राप्त दान से संबंधित साक्ष्यों, रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल लॉग के तत्काल संरक्षण तथा दान की स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट की मांग की थी। वे राष्ट्रीय महत्व के धार्मिक स्थलों के लिए एक राष्ट्रीय न्यूनतम मंदिर दान पारदर्शिता ढांचा तैयार करने हेतु एक विशेषज्ञ समिति के गठन की भी मांग कर रहे थे।

पिछली सुनवाई में, एसआईटी की रिपोर्ट में कहा गया था कि मंदिर दान हेराफेरी मामले में अनधिकृत रूप से नकदी निकाले जाने की 105 घटनाएं सीसीटीवी में कैद हुई थीं। सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि जांच दल ने यह पता लगा लिया है कि चुराया गया पैसा कहां और कैसे इस्तेमाल किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, 803 मूल्यवान वस्तुओं के रिकॉर्ड की भौतिक जांच की गई, जिसमें कोई विसंगति नहीं पाई गई, जबकि 86 बिना रसीद वाली वस्तुओं को अलग से सत्यापित किया गया। 173 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। इस मामले की प्राथमिकी में आठ लोगों और अन्य अज्ञात व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है।