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दस हजार भूतिया वोटरों से सात हजार में जीत

चुनाव आयोग का एक और खेल देश के सामने आया

पीलीभीत के चुनाव का मामला है यह

चर्चा होने के बाद अफसरों पर कार्रवाई

कहां से वोटर आये, इसका पता नहीं

राष्ट्रीय खबर

लखनऊः उत्तर प्रदेश के पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची से जुड़ा एक बड़ा और गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ जीत-हार का अंतर मात्र 7,000 वोटों से भी कम था, उसी निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता सूची के भीतर 10,470 संदिग्ध प्रविष्टियाँ पाई गई हैं। इस पूरे प्रकरण ने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए त्वरित दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा इस संबंध में हाल ही में एक आधिकारिक बयान जारी किया गया। इस बयान के अनुसार, पीलीभीत विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची की गहन जाँच-पड़ताल के दौरान कुल 10,470 प्रविष्टियों में गंभीर स्तर की अनियमितताएं पाई गईं। इन गड़बड़ियों के सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग ने तुरंत संज्ञान लेते हुए दो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (EROs) के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता पंजीकरण केंद्र पर तैनात एक कंप्यूटर सहायक की सेवाएँ भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गईं।

सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया को बढ़ाते हुए तीनों आरोपितों के विरुद्ध एक आधिकारिक प्राथमिकी दर्ज करा दी गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय द्वारा जारी किए गए विस्तृत बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि पीलीभीत के जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा एक उच्च-स्तरीय जाँच रिपोर्ट सौंपी गई थी। इस रिपोर्ट में यह तथ्य उजागर हुआ कि उक्त कंप्यूटर सहायक द्वारा 31 मई से 29 अगस्त, 2026 के बीच मतदाताओं के विवरण में संशोधन के लिए कुल 13,779 फॉर्म-8 आवेदन ऑनलाइन दर्ज किए गए थे।

हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी संख्या में किए गए इन आवेदनों से संबंधित कोई भी भौतिक फॉर्म (दस्तावेज) या फिर उनके समर्थन में पेश किए जाने वाले जरूरी सहायक रिकॉर्ड कार्यालय के रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं थे। इस तरह बिना किसी भौतिक सत्यापन या पुख्ता दस्तावेजों के प्रविष्टियों में बदलाव करने से चुनाव व्यवस्था की आंतरिक कार्यप्रणाली और सुरक्षा पर भी कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इस तरह की प्रशासनिक चूक और संदिग्ध प्रविष्टियों के खुलासे से राजनीतिक गलियारों में भी सुगबुगाहट तेज हो गई है, और निर्वाचन आयोग इस बात की पूरी तह तक जाने का प्रयास कर रहा है कि इस फर्जीवाड़े के पीछे आखिर किसकी मिलीभगत थी।