सीरिया के सूचना मंत्रालय ने मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया
सानाः सीरिया के सूचना मंत्रालय ने कहा है कि यह रिपोर्ट पूरी तरह गलत है कि सीरियाई सरकार के प्रतिनिधियों ने तुर्किए में हिजबुल्लाह के साथ सीधी और गुप्त बैठकें की हैं। यह स्पष्टीकरण हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आई उन खबरों के बाद आया है, जिन्होंने मध्य पूर्व की राजनीति में हलचल मचा दी थी।
प्रमुख समाचार एजेंसी ने अपनी एक रिपोर्ट में यह दावा किया था कि सीरियाई अधिकारियों और ईरान समर्थित समूह हिजबुल्लाह के प्रतिनिधियों के बीच सितंबर के महीने में एक गुप्त बैठक हुई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि उन्होंने इस संबंध में छह अलग-अलग और भरोसेमंद सूत्रों से बात की थी, जिनमें दो सीरियाई अधिकारी, एक अमेरिकी अधिकारी और हिजबुल्लाह के करीबी एक वरिष्ठ लेबनानी सुरक्षा अधिकारी शामिल थे। इन सूत्रों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए उनकी पहचान गुप्त रखी गई थी।
सीरियाई सूचना मंत्रालय ने गुरुवार को अपने आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर एक कड़ा बयान जारी करते हुए इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ये सभी दावे पूरी तरह से असत्य, निराधार और मनगढ़ंत हैं, तथा ऐसी कोई भी बैठक कभी आयोजित नहीं हुई थी। इसके साथ ही, तुर्किए, जिस पर इस कथित गुप्त बैठक की मध्यस्थता करने का आरोप लगाया गया था, उसने भी इन खबरों का पुरजोर खंडन किया है। तुर्किए सरकार ने भी गुरुवार को एक्स पर जारी अपने एक आधिकारिक बयान में इन सभी खबरों को पूरी तरह से आधारहीन करार दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीरिया के नए नेतृत्व और लेबनानी राजनीतिक दल हिजबुल्लाह के बीच आपसी तनाव और दूरियां बहुत गहरी हैं। ईरान समर्थित हिजबुल्लाह ने बशर अल-असद के शासनकाल की रक्षा के लिए वर्षों तक खूनी लड़ाइयाँ लड़ी थीं। इस दौरान हिजबुल्लाह ने अल-नुस्रा फ्रंट जैसे विद्रोही गुटों के साथ हिंसक संघर्ष किए थे, जिसका नेतृत्व वर्तमान सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शारा द्वारा किया जाता था।
यही कारण है कि इन दोनों पारंपरिक और लंबे समय से चले आ रहे विरोधियों के बीच इस तरह की किसी भी बैठक की खबर ने भू-राजनीतिक गलियारों में भारी चर्चा पैदा कर दी थी। रॉयटर्स की रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि यह कथित बैठक क्षेत्रीय तनाव को कम करने के उद्देश्य से तुर्किए की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के विशेष निमंत्रण पर आयोजित की गई थी।
समाचार के अनुसार, एक सीरियाई अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया था कि इस बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई थी कि वे एक-दूसरे के प्रति किसी भी प्रकार की आपसी दुश्मनी नहीं रखते हैं। सीरिया ने कथित तौर पर हिजबुल्लाह को यह आश्वासन भी दिया था कि वह लेबनान में सैन्य रूप से हस्तक्षेप नहीं करेगा और न ही उस सशस्त्र समूह को निरस्त्र करने का कोई प्रयास करेगा, जो वर्तमान में दक्षिणी लेबनान में इजरायल के खिलाफ युद्ध लड़ रहा है।
इसके बदले में, सीरियाई अधिकारियों ने कथित तौर पर हिजबुल्लाह से यह अनुरोध किया था कि वह सीमा पार से होने वाली तस्करी के प्रयासों को रोकने में मदद करे और विशेष रूप से दक्षिणी सीरिया में मौजूद अपने शेष स्लीपर सेल या गुप्त नेटवर्क को समाप्त करे। इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि दोनों पक्षों के बीच तनाव को सुलझाने पर केंद्रित यह कथित बैठक काफी हद तक सकारात्मक रही थी।
इसके अतिरिक्त, एक लेबनानी सूत्र ने यह भी जानकारी दी थी कि तुर्किए के माध्यम से इन दोनों पक्षों के बीच संपर्क और संवाद का यह सिलसिला लगभग दो महीने पहले ही शुरू हो गया था। बहरहाल, सीरियाई और तुर्किए सरकारों द्वारा इन गुप्त वार्ताओं के आधिकारिक खंडन के बाद, इस पूरे मामले पर कूटनीतिक हलकों में लगातार मंथन और अटकलों का दौर जारी है।