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जो पर्यावरण पर बोलते हैं वे परमाणु ऊर्जा रोकते हैः मोदी

अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में पीएम ने गंभीर वैश्विक बात कही

भारत स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ा रहा है

शिकायत करने वाले अदालत जाते हैं

देश की ऊर्जा जरूरतें काफी बढ़ गयी है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सरकार के परमाणु ऊर्जा के प्रयासों की आलोचना करने वालों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग पर्यावरण संरक्षण के बारे में सबसे ज्यादा ऊंची आवाज में बोलते हैं, वे ही परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं को रोकने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाते हैं।

नई दिल्ली में पर्यावरण और जलवायु पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत परमाणु ऊर्जा का तेजी से विस्तार कर रहा है और साथ ही अपनी नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को भी बढ़ा रहा है। सरकार ने इस क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोल दिया है।

लेकिन उन्होंने अफसोस जताया कि जब भी वे परमाणु ऊर्जा उत्पादन के काम को आगे बढ़ाते हैं, तो पर्यावरण पर बड़े-बड़े उपदेश देने वाले लोग सरकारी पहलों को रोकने के लिए अदालत में मुकदमे दायर करके स्वच्छ ऊर्जा समाधानों का सक्रिय रूप से विरोध करते हैं। उन्होंने कहा, पर्यावरण पर बड़े-बड़े भाषण देने वाले लोग, जब मैं परमाणु ऊर्जा के काम को आगे बढ़ाता हूँ, तो इसे रोकने के लिए अदालतों में चले जाते हैं।

भारत स्वदेशी स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर पर जोर दे रहा है, जिसका लक्ष्य अगले दो दशकों में परमाणु ऊर्जा क्षमता स्थापना में तेजी लाने के लिए 2033 तक कम से कम पांच चालू इकाइयां स्थापित करना है। विद्युत मंत्रालय की 2025 की 100 गीगावॉट रोडमैप रिपोर्ट के अनुसार, भारत का लक्ष्य अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को मौजूदा 8.8 गीगावॉट से बढ़ाकर 2047 तक 100 गीगावॉट करना है। इसके लिए लगभग 19.28 लाख करोड़ रुपये की संचयी पूंजी की आवश्यकता होगी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश की पवन ऊर्जा क्षमता तीन गुना बढ़ गई है और जलविद्युत क्षमता में भी उछाल आया है। अब देश परमाणु ऊर्जा उत्पादन पर तेजी से काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि विकसित देशों में प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन भारत की तुलना में छह गुना अधिक है, और भारत वैश्विक मंचों पर इस तथ्य को मजबूती से रखता है। उन्होंने हर भारतीय से आग्रह किया कि वे भी इसे पूरी ताकत से कहें।

उन्होंने कहा कि कार्बन उत्सर्जन की जिम्मेदारी अक्सर विकासशील देशों पर गलत तरीके से मढ़ दी जाती है, जबकि ऐतिहासिक सच्चाई यह है कि आज भी भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक औसत से आधा से भी कम है। देश स्वच्छ गतिशीलता (क्लीन मोबिलिटी) और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम कर रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि कुछ दिन पहले ही भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन चली है, जो दुनिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन है और यह स्वच्छ गतिशीलता में एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है।

प्रधानमंत्री ने बताया कि 2014 से पहले भारत में हर साल केवल 3,000 ई-वाहन बिकते थे, जबकि पिछले साल लगभग 25 लाख ईवी बिके, जो कि एक अविश्वसनीय वृद्धि है। इससे पर्यावरण को काफी मदद मिल रही है। इसके अलावा, फास्टैग की वजह से टोल बूथों पर प्रतीक्षा समय और ईंधन की बर्बादी में भी भारी कमी आई है।