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अल्जीरिया ने संयुक्त अरब अमीरात से संबंध तोड़ लिये

पूर्व के घटनाक्रमों और चेतावनियों का उल्लेख कर लिया फैसला

दुबईः अल्जीरिया ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ अपने सभी कूटनीतिक संबंधों को पूरी तरह से तोड़ने का एक ऐतिहासिक और कड़ा निर्णय लिया है। अल्जीरियाई विदेश मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयान में यह स्पष्ट किया गया है कि यह गंभीर कदम “द्विपक्षीय संबंधों को संरक्षित करने और बचाने के लिए किए गए सभी कूटनीतिक प्रयासों और साधनों के पूरी तरह समाप्त होने” के बाद उठाया गया है।

मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि अल्जीरिया ने लंबे समय तक धैर्य का परिचय देते हुए यूएई को उसकी शत्रुतापूर्ण और आपत्तिजनक गतिविधियों के बारे में लगातार आगाह किया था। अमीराती पक्ष का ध्यान इस ओर आकर्षित करने के लिए भारी कूटनीतिक प्रयास किए गए ताकि उन्हें उनके इस खेदजनक, गैर-जिम्मेदाराना और अनुचित व्यवहार के गंभीर परिणामों के प्रति सचेत किया जा सके।

हालांकि, बार-बार दी जाने वाली चेतावनियों और कूटनीतिक संदेशों के बावजूद, संयुक्त अरब अमीरात ने अपनी उन हरकतों को लगातार जारी रखा। अल्जीरिया का मानना है कि यूएई का यह आचरण अब दो संप्रभु और स्वतंत्र राज्यों के बीच आपसी संबंधों के स्थापित दायरे में किसी भी स्थिति में स्वीकार्य, सहन करने योग्य या माफ करने लायक नहीं बचा है, और इसे और अधिक समय तक बिना किसी ठोस जवाब के नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था।

इसी के परिणामस्वरूप, अल्जीरियाई विदेश मंत्रालय ने तुरंत प्रभाव से यूएई के राजदूत को इस कड़े फैसले की औपचारिक जानकारी दे दी है और उन्हें अपने देश लौटने के लिए मात्र 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए देश छोड़ने का आदेश जारी कर दिया है।

विश्लेषकों और जानकारों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच भू-राजनीतिक मुद्दों को लेकर तनाव लगातार और खतरनाक स्तर तक बढ़ता चला गया था। इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि यूएई मध्य पूर्व और उत्तर अफ्रीका के संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार ऐसी अस्थिर करने वाली भूमिका निभा रहा है जो क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है।

अल्जीरियाई राष्ट्रपति अब्देलमदजिदे तेब्बून ने पूर्व में भी कई बार अप्रत्यक्ष रूप से यूएई पर करारा प्रहार करते हुए सार्वजनिक रूप से यह बयान दिया था कि दुनिया में जहां कहीं भी अशांति और संघर्ष की स्थिति उत्पन्न होती है, वहां इस खाड़ी देश का पैसा और हस्तक्षेप प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अवश्य शामिल होता है।

अल्जीरिया द्वारा उठाया गया यह अप्रत्याशित और कड़ा कदम मुख्य रूप से लीबिया, सूडान और यमन जैसे संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में अलगाववादी समूहों को यूएई द्वारा दिए जा रहे भारी समर्थन और लीबिया के रास्ते अल्जीरिया की अपनी सीमाओं के पास सुनियोजित तरीके से अस्थिरता पैदा करने की कोशिशों के बाद उठाया गया है। इसके अलावा, रणनीतिक रूप से संवेदनशील पश्चिमी सहारा के गंभीर मुद्दे पर यूएई द्वारा मोरक्को का खुला समर्थन किया जाना भी अल्जीरिया को लंबे समय से नागवार गुजर रहा था।

स्थिति तब और अधिक गंभीर हो गई जब अल्जीरिया के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करते हुए वहां के कबाइली स्वायत्तता आंदोलन (एमएके) संगठन के साथ यूएई के संभावित संपर्कों की बात सामने आई। अल्जीरिया इस संगठन को एक आतंकवादी संगठन मानता है, और इसके साथ किसी भी प्रकार का संपर्क उसकी राष्ट्रीय एकता और संप्रभुता की वह मुख्य लाल रेखा है जिसे पार करना अल्जीरिया के लिए पूरी तरह असहनीय था। इन तमाम संचित कारणों और क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं के चलते ही अल्जीरिया को यूएई के साथ अपने दशकों पुराने राजनयिक रिश्तों को पूरी तरह खत्म करने का यह बड़ा फैसला लेना पड़ा।