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हिमाचल के 65 मामले सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से वापस

कोविड महामारी के दौरान दर्ज हुए थे नियम उल्लंघन के मामले

विभिन्न कालखंड में दर्ज हुए थे मामले

इनमें से कोई भी गंभीर अपराध नहीं था

कुछ अन्य मामलों की आगे समीक्षा होगी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश सरकार को कोविड-19 महामारी के कठिन दौर के दौरान लॉकडाउन तथा नियमों के उल्लंघन से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के मामलों में वर्तमान और पूर्व विधायकों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमों को वापस लेने की औपचारिक अनुमति प्रदान कर दी है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली एक विशेष तीन सदस्यीय बेंच ने यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट किया कि ये सभी मामले किसी भी प्रकार के गंभीर या जघन्य अपराधों से जुड़े नहीं थे और वैश्विक महामारी का वह समय पूरी तरह से एक असाधारण और अभूतपूर्व परिस्थितियों वाला दौर था।

इस कानूनी प्रक्रिया की पृष्ठभूमि के तहत, हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के विभिन्न राजनीतिक दलों से संबंध रखने वाले मौजूदा और पूर्व विधायकों के खिलाफ दर्ज लगभग 65 ऐसे मामलों को वापस लेने की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू की थी, जो महामारी काल के दौरान पुतले फूंकने, मुख्य राजमार्गों पर धरना प्रदर्शन करने तथा आपदा प्रबंधन अधिनियम या भारतीय दंड संहिता की धारा 269 के तहत संक्रमण फैलाने वाले लापरवाही भरे कृत्यों के उल्लंघन से संबंधित थे। हालांकि, शुरुआती दौर में अप्रैल 2024 के दौरान हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने केवल 15 मामलों को ही वापस लेने की अनुमति दी थी और बाकी के शेष मामलों को खारिज कर दिया था, जिसके बाद राज्य सरकार ने असंतुष्ट होकर शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। कानूनी प्रक्रिया और मध्यवर्ती अवधि में कुछ मामलों के आपसी निपटारे के बाद, सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रभावी रूप से शेष बचे मामलों पर ही विचार किया गया।

सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने अपने विस्तृत आदेश में यह स्पष्ट किया कि इन पुराने मामलों को आगे भी कानूनी रूप से जारी रखना न्याय प्रशासन के व्यापक हितों में बिल्कुल भी नहीं है, बल्कि इससे अदालतों का वह बहुमूल्य समय अनावश्यक रूप से बर्बाद होगा जिसे अन्य अति-महत्वपूर्ण और गंभीर मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने में लगाया जाना चाहिए। अदालत ने इस बात को भी प्रमुखता से माना कि आरोपी कोई आदतन अपराधी नहीं हैं, बल्कि वे उस समय के जनप्रतिनिधि थे जो महामारी की अकल्पनीय और कठिन परिस्थितियों के बीच आम जनता की आवाज बुलंद करने के लिए सड़कों पर उतरे थे। इस ऐतिहासिक और राहत भरे फैसले के बाद अब संबंधित ट्रायल अदालतों द्वारा इन सभी मामलों को औपचारिक रूप से बंद करने की आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।