हूती हमलों के दौरान तीन सौ से अधिक मारे गये
अदनः दक्षिण-पश्चिम यमन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार की समर्थित सेना और हूती विद्रोहियों के बीच लाल सागर के रणनीतिक समुद्री मार्गों पर वर्चस्व स्थापित करने के लिए एक बार फिर भयानक संघर्ष छिड़ गया है। सैन्य और चिकित्सा स्रोतों द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, हालिया सैन्य वृद्धि में अब तक कम से कम 300 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है।
दोपहर से रविवार तड़के के बीच हुए भीषण हमलों में ही 84 सरकारी सैनिक और 57 हूती लड़ाके मारे गए। अदन स्थित सऊदी-समर्थित सरकारी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि उनके अधिकांश सैनिकों की मृत्यु हूती बलों द्वारा किए गए घातक मिसाइल हमलों के कारण हुई है। इस हिंसा की चपेट में आकर कई निर्दोष आम नागरिकों को भी अपनी जान गंवानी पड़ी है।
इस भयंकर युद्ध का मुख्य केंद्र ताइज़ प्रांत के दो प्रमुख क्षेत्र—मकबाना और जबल हबाशी बने हुए हैं। हूती विद्रोही इन इलाकों पर कब्ज़ा जमाकर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर मोखा और लाल सागर के दक्षिणी प्रवेश द्वार बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य को जोड़ने वाले परिवहन मार्गों को पूरी तरह से काटने का प्रयास कर रहे हैं। शनिवार की शाम हूती विद्रोहियों ने ताइज़ और मोखा के बीच संपर्क स्थापित करने वाली मुख्य सड़क को काटने में सफलता भी प्राप्त कर ली।
युद्ध के इस विकराल रूप ने स्थानीय आबादी को तबाह कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र मानवीय सहायता समन्वय कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक, अंधाधुंध गोलाबारी के चलते लगभग 1,790 परिवार (हजारों नागरिक) अपने घरों से बेघर हो चुके हैं। विस्थापित लोग अल-बरीन जैसे अस्थायी शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं, जहाँ भोजन, पानी और बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि गोलीबारी इतनी भीषण थी कि वे अपने बच्चों के साथ बिना चप्पल-जूते पहने ही जान बचाकर भागे।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता ने इस गंभीर सैन्य टकराव पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी दी है कि इस हिंसा के यमन और उसके नागरिकों के लिए विनाशकारी राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा परिणाम होंगे। हालांकि अदन स्थित यमनी सरकार के सैन्य अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने रविवार तड़के हैस क्षेत्र के उत्तर में कुछ ज़मीनी बढ़त हासिल की है, लेकिन यूके स्थित थिंक टैंक ‘चथम हाउस’ के पश्चिम एशिया विशेषज्ञ फेरिया अल-मुस्लिमी का मानना है कि हूती विद्रोही बेहद रणनीतिक तरीके से मोखा, ताइज़ और बाब अल-मंदब के बीच की कड़ी को तोड़कर क्षेत्र पर अपना दबदबा मजबूत कर रहे हैं।