भारत के जीडीपी सुधार के आंकड़ों का नया खेल सामने आया
गोल पोस्ट बदलने का नया खेल
इस बार यह बाजीगरी पकड़ी गयी
वास्तव में सुधार कहीं नहीं हुआ है
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्लीः भारत के सांख्यिकी सचिव ने देश के नवीनतम 7.8 फीसद के विकास दर अनुमान और हाल के जीडीपी आंकड़ों में किए गए बड़े संशोधनों का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव आंकड़ों में किसी व्यवस्थित पूर्वाग्रह के कारण नहीं, बल्कि अधिक विस्तृत मूल्य डेटा और अतिरिक्त स्रोतों के उपयोग के कारण हुए हैं। सांख्यिकी मंत्रालय ने किसी भी तरह की गड़बड़ी की व्याख्या को खारिज करते हुए कहा कि नवीनतम आंकड़े 2022/23 आधार वर्ष वाली एक नई जीडीपी श्रृंखला पर आधारित हैं। इसके तहत अद्यतन स्रोतों और नई कार्यप्रणाली को शामिल करने के लिए ऐतिहासिक आंकड़ों को भी संशोधित किया गया है।
सांख्यिकी सचिव सौरभ गर्ग ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा, यह दोनों कारणों का एक संयोजन है, जिसके परिणामस्वरूप ये संशोधन हुए हैं। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों से पता चला कि अप्रैल-जून तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी है, जिसने अर्थशास्त्रियों के अनुमानों को आसानी से पीछे छोड़ दिया। हालांकि जनवरी-मार्च तिमाही के 8.6 प्रतिशत की तुलना में विकास दर धीमी रही, लेकिन इसे पहले के 7.8 प्रतिशत के अनुमान से संशोधित कर 8.6 प्रतिशत किया गया था। फिर भी, अप्रैल-जून की वृद्धि दर एक साल पहले के 6.9 प्रतिशत से तेज थी और पहली तिमाही के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 7 प्रतिशत के पूर्वानुमान से अधिक रही।
पूर्व वित्त सचिव की टिप्पणियों को तब और बल मिला जब विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने सरकार पर आंकड़े बदलने और 7.8 प्रतिशत की विकास दर पर संदेह जताने का आरोप लगाया। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने इन आंकड़ों को सांख्यिकी जिम्नास्टिक करार दिया। सांख्यिकी सचिव ने आगे स्पष्ट किया कि हाल की तिमाहियों के संशोधनों के पीछे थोक मूल्य डेटा से उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) की ओर स्विच करना और अधिक डेटा स्रोतों को जोड़ना भी मुख्य कारण था।
सौरभ गर्ग ने कहा, पीपीआई अधिक विस्तृत मूल्य जानकारी प्रदान करता है, जिससे अनुमानों में उपयोग किए जाने वाले डिफ्लेटर की संख्या पहले के लगभग 180 से बढ़कर 300 से अधिक हो गई है। इसके साथ ही उन्होंने उन सुझावों को भी खारिज कर दिया जिनमें यह कहा जा रहा था कि संशोधनों के माध्यम से जानबूझकर पिछले वर्ष के आधार को कम किया जा रहा है ताकि बाद की विकास दर को बढ़ाकर दिखाया जा सके।