रायपुर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ में बिजली व्यवस्था के कथित निजीकरण की अटकलों और बिलासपुर में भड़की हालिया हिंसा को लेकर सत्तापक्ष एवं विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
एक ओर जहां मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य सरकार पर जनता के हितों से विश्वासघात करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विपक्ष के इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे ‘दुष्प्रचार और भ्रम फैलाने की राजनीति’ करार दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विद्युत विनियामक आयोग के समक्ष जारी सुनवाई एक नियमित (रूटीन) वैधानिक प्रक्रिया है और इसका तात्पर्य बिजली के निजीकरण से बिल्कुल नहीं है।
💡 बिजली निजीकरण के दावों पर CM का पलटवार: दीपक बैज के आरोपों का दिया जवाब
विपक्ष के आरोप और सरकार का रुख:
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दीपक बैज के आरोप: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार बिजली की दरों में वृद्धि, 400 यूनिट हाफ योजना पर असर और स्मार्ट मीटर लगाने के बाद अब वितरण का जिम्मा निजी कंपनियों को सौंपने तथा बिजली कंपनी के शेयर बेचने की तैयारी कर रही है।
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सीएम का स्पष्टीकरण: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस जनता में अनावश्यक गलतफहमी और अफवाहें फैला रही है। विद्युत नियामक आयोग की चल रही प्रक्रियाएं पूरी तरह सामान्य प्रशासनिक और विनियामक समीक्षा का हिस्सा हैं।
⚔️ बिलासपुर हिंसा को लेकर भूपेश बघेल का हमला: गृह मंत्री के गृह जिले पर उठाए सवाल
विपक्ष का कानून-व्यवस्था पर प्रहार:
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भूपेश बघेल का बयान: पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बिलासपुर के खपरगंज में हुई हिंसक झड़प को लेकर राज्य सरकार और गृह मंत्री पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जब गृह मंत्री अपने गृह जिले की कानून-व्यवस्था नहीं संभाल पा रहे हैं, तो पूरे प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा होता है।
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कार्रवाई की मांग: बघेल ने आरोप लगाया कि प्रशासन त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय केवल बयानबाजी में समय व्यर्थ कर रहा है।
🚨 CM साय बोले- ‘दो लोगों का व्यक्तिगत विवाद था, स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में’
बिलासपुर खपरगंज घटनाक्रम और प्रशासनिक कार्रवाई:
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विवाद की वजह: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि खपरगंज में दो पक्षों के मध्य हुआ आपसी विवाद व्यक्तिगत कारणों से शुरू हुआ था, जिसे कुछ असामाजिक तत्वों ने हवा दी। पुलिस-प्रशासन ने त्वरित हस्तक्षेप कर हालात को पूरी तरह सामान्य बना लिया है।
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उपद्रव और नुकसान: विवाद के दौरान पथराव, वाहनों में तोड़फोड़ और संपत्तियों को क्षति पहुंचाई गई थी, जिसे नियंत्रित करने हेतु पुलिस को हल्का बल प्रयोग (लाठीचार्ज) और आंसू गैस के गोले दागने पड़े।
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सख्त कानूनी एक्शन: कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह ने संवेदनशील क्षेत्रों का दौरा कर फ्लैग मार्च कराया। सीसीटीवी व ड्रोन कैमरों के फुटेज से उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। दोनों पक्षों के नामजद आरोपियों पर बलवा और हत्या के प्रयास सहित गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए हैं तथा क्षेत्र में प्रतिबंधात्मक धाराएं लागू हैं।