शिवसेना उद्धव और भाजपा कार्यकर्ताओँ के बीच जोरदार झड़प
एसआईआर के फॉर्म छापे जा रहे थे
झगड़े की सूचना पर पुलिस भी पहुंची
भाजपा का नेता वहां से गिरफ्तार हुआ
राष्ट्रीय खबर
मुंबईः नवी मुंबई के खारघर क्षेत्र में शुक्रवार को उस समय भारी राजनीतिक हंगामा खड़ा हो गया, जब एक फोटोकॉपी की दुकान में हजारों की संख्या में मुद्रित (प्रिंटेड) विशेष गहन संशोधन फॉर्म पाए गए। इस घटना की जानकारी मिलते ही शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई, जिसने जल्द ही हिंसक झड़प का रूप ले लिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई।
पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ताओं को खारघर स्थित एक ज़ेरॉक्स दुकान में भारी मात्रा में एसआईआर फॉर्म मुद्रित होने की भनक लगी। कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर एक व्यक्ति को पकड़ा और दावा किया कि वह भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) का पदाधिकारी है। आरोप है कि यह व्यक्ति अनधिकृत रूप से दुकान पर हजारों एसआईआर फॉर्म की फोटोकॉपी करवा रहा था, जिसका इस्तेमाल चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता था। शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं ने इस गतिविधि पर गंभीर आपत्ति जताई और स्थानीय प्रशासन से निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
घटना की सूचना मिलने के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस स्टेशन की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने संदिग्ध भाजपा पदाधिकारी को हिरासत में ले लिया और दुकान परिसर से हजारों की संख्या में छपे हुए एसआईआर फॉर्म जब्त कर थाने पहुंचाए। हालांकि, मामला उस समय और अधिक तूल पकड़ गया जब शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन पर ढिलाई का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि हिरासत में लिया गया युवा नेता पूछताछ के दौरान खारघर पुलिस स्टेशन से भागने में सफल रहा, जो पुलिस की मिलीभगत या बड़ी लापरवाही को दर्शाता है।
शिवसेना (यूबीटी) के स्थानीय प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि सरकारी या प्रशासनिक फॉर्म का इस प्रकार निजी दुकान पर भारी मात्रा में मिलना किसी बड़े राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा हो सकता है। दूसरी ओर, नवी मुंबई पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम की गहनता से जांच की जा रही है। जब्त किए गए दस्तावेजों की प्रामाणिकता की जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि ये फॉर्म किस उद्देश्य से और किसके आदेश पर छपवाए जा रहे थे। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है।