नई दिल्ली: पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिश्रण (E20 Petrol) के बढ़ते उपयोग के बीच वाहन चालकों और ऑटोमोबाइल निर्माताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है।
ऑटो कंपनियों द्वारा E20 ईंधन की गुणवत्ता, नमी और इंजनों में जंग लगने की आशंकाओं को लेकर जताई गई चिंताओं के बाद केंद्र सरकार तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के लिए नियमों को सख्त बनाने जा रही है। अब तक इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल में ‘क्लोराइड कंटामिनेशन’ (Chloride Contamination) को नियंत्रित रखना एक स्वैच्छिक मानक था, जिसे अब भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) कानूनी रूप से अनिवार्य (Mandatory) करने की दिशा में कार्य कर रहा है।
📜 3 PPM से कम रखनी होगी क्लोराइड की मात्रा: BIS बदलेगा नियम
मानकों में बदलाव और सख्त गाइडलाइंस:
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3 PPM की सीमा: नए दिशा-निर्देशों के तहत तेल विपणन कंपनियों और पूरे फ्यूल सप्लाई इकोसिस्टम के लिए E20 पेट्रोल में क्लोराइड के स्तर को 3 पार्ट्स प्रति मिलियन (ppm) से नीचे रखना अनिवार्य किया जाएगा।
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स्वैच्छिक से अनिवार्य नियम: वर्तमान में यह सीमा केवल एक वैकल्पिक गुणवत्ता मानक थी, जिसे अब BIS अनिवार्य तकनीकी आवश्यकता में तब्दील कर रहा है।
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अधिकारियों का रुख: नियामक अधिकारियों के अनुसार, संदूषण (कंटामिनेशन) की सीमा तय होने से देश भर में सप्लाई होने वाले पेट्रोल की शुद्धता और एकसमान गुणवत्ता सुनिश्चित होगी।
🛠️ क्यों उठाना पड़ा यह कदम? ऑटोमोबाइल कंपनियों ने उठाई थीं चिंताएं
इंजन पार्ट्स और फ्यूल क्वालिटी से जुड़ी मुख्य वजहें:
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जंग और पार्ट्स का क्षरण: वाहन निर्माताओं ने शिकायत दर्ज कराई थी कि कई फ्यूल स्टेशनों पर मिलने वाले E20 पेट्रोल में क्लोराइड और नमी का स्तर अधिक पाया गया है, जिससे इंजन कंपोनेंट्स में जंग और खराबी की घटनाएं बढ़ रही हैं।
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टैंक सैंपलिंग में अशुद्धियां: कई गाड़ियों के फ्यूल टैंक से लिए गए परीक्षण नमूनों में क्लोराइड की मात्रा तय मानकों से अधिक मिली थी।
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ईंधन की शुद्धता का संकल्प: चूंकि भारत ने 20% इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य तय समय से पांच वर्ष पहले ही हासिल कर लिया है और भविष्य में उच्च ब्लेंडिंग की योजना है, इसलिए ईंधन की शुद्धता सुनिश्चित करना इंजन लाइफ के लिए बेहद अहम हो गया है।