बयान देकर बहुत बुरे फंस गये हैं बीसीआई के अध्यक्ष महोदय
बीसीआई की कुर्सी छोड़ने की मांग
युवा वकीलों ने भी प्रदर्शन किया है
वकीलों के लिए कोई काम नहीं किया
राष्ट्रीय खबर
मुंबईः बार काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रमुख मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ वकीलों और छात्रों का असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपे ने बुधवार देर रात बीसीआई प्रमुख को एक तीखा संदेश भेजा। यह विवाद तब और गहरा गया जब सीजेपी ने मिश्रा के दिल्ली स्थित कार्यालय पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया और कानूनी बिरादरी से इसमें शामिल होने की अपील की। आंदोलन के दौरान सीजेपी नेता सौरव दास ने प्रदर्शन के दृश्य साझा करते हुए बताया कि बीसीआई प्रमुख को एक ज्ञापन सौंपकर उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की गई है। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि उन्होंने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में एक बड़ा और व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
आधिकारिक तौर पर इस प्रदर्शन का नेतृत्व ऑल इंडिया यंग लॉयर्स एसोसिएशन द्वारा किया गया था। प्रदर्शन में शामिल एडवोकेट रमन शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह किसी बाहरी मुद्दे के बजाय अधिवक्ताओं द्वारा अपने ही सर्वोच्च निकाय के नेतृत्व के खिलाफ एक वैचारिक और व्यावहारिक आंदोलन है। वकीलों का मुख्य सवाल यह है कि पिछले 14 वर्षों से इस पद पर बने रहने के बावजूद अध्यक्ष ने कानूनी बिरादरी के कल्याण के लिए वास्तव में क्या ठोस कार्य किए हैं।
इस पूरे विवाद की जड़ पिछले हफ्ते सामने आया वह बयान है, जिसमें बार काउंसिल प्रमुख मनन कुमार मिश्रा ने तीखा रोष व्यक्त किया था। मिश्रा ने घोषणा की थी कि वर्ष 2026 के नालसार लॉ यूनिवर्सिटी के स्नातकों को बार में नामांकन से वंचित कर दिया जाएगा।
यह कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि इनमें से कई छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को अपने दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। छात्रों द्वारा यह विरोध दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कथित तौर पर अत्यधिक बल प्रयोग किए जाने से जुड़ी याचिकाओं पर मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणियों के विरोध में दर्ज किया गया था। इस घटना के बाद से ही न्यायपालिका, बार काउंसिल और युवा वकीलों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है।