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चेहरा दिखाकर बिना कुछ कहे भाग निकले दोनों शीर्ष मंत्री

वंदे मातरम के बाद तीन मिनट में सभा समाप्त

सदन के बाहर भी जोरदार नारेबाजी

राम मंदिर और दिल्ली दोनों पर चुप्पी

विदाई संबोधन भी नहीं पढ़ा बिड़ला ने

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः यह स्पष्ट हो गया कि केंद्र सरकार के सबसे कद्दावर दो मंत्री दरअसल विपक्ष के सवालों से दो चार नहीं होना चाहते थे। लोकसभा अध्यक्ष ने भी उनकी राह आसान कर दी। गुरुवार की सुबह लोकसभा के इस मानसून सत्र का संभवतः सबसे शांत समय रहा, जो महज तीन मिनट और दस सेकंड तक ही सीमित रहा। सदन की कार्यवाही शुरू होने पर राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम बजाया गया और प्रधानमंत्री सहित सभी माननीय सदस्य सम्मान में सचेत खड़े रहे। इसके तुरंत बाद लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने की औपचारिक घोषणा कर दी।

सदन की शुरुआत पूर्व निर्धारित और परिचित हंगामेदार दृश्यों के साथ हुई थी। जैसे ही गृह मंत्री अमित शाह सुबह 11:00 बजे से पहले लोकसभा में पहुंचे, विपक्ष ने माफी मांगो, माफी मांगो और लाठीचार्ज का आदेश किसने दिया? जैसे तीखे नारे लगाने शुरू कर दिए। इसके जवाब में सत्ता पक्ष के सांसदों ने भी जोरदार हंगामा किया, जबकि गृह मंत्री अमित शाह ने सभी को अपनी सीटों पर बैठने का इशारा किया। सत्ता पक्ष के सांसद तो अपनी सीटों पर बैठ गए, लेकिन अमित शाह विपक्ष की नारेबाजी को देखकर मुस्कुराते रहे।

इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन के भीतर आए। तभी वंदे मातरम की धुन बजाई गई और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सत्र के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने की घोषणा कर दी। इस तरह एक बेहद तूफानी सत्र का समापन हुआ, जिसमें जमकर नारेबाजी, हंगामा, आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला और पेपर लीक से जुड़े नए कानून पर हुई संक्षिप्त चर्चा को छोड़कर सदन में लगभग कोई सार्थक बहस नहीं हो सकी।

खास बात यह रही कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सत्र के समापन पर दिए जाने वाला पारंपरिक विदाई संबोधन नहीं पढ़ा, जिसमें आमतौर पर सत्र के दौरान लोकसभा के प्रदर्शन और उसकी उत्पादकता का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जाता है। दरअसल, इस बार सदन की उपलब्धियों के बारे में बात करने के लिए कुछ खास बचा ही नहीं था।

दूसरी ओर, राज्यसभा की कार्यवाही भी संक्षिप्त बैठक के बाद अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। उच्च सदन में कांग्रेस पार्टी ने उत्तराखंड में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे के अपमान का मुद्दा प्रमुखता से उठाया, जहां एक रैली के बाद कथित तौर पर कुछ लोगों द्वारा उस स्थल को शुद्ध किया गया था, जहां उनका कार्यक्रम आयोजित हुआ था।

इसके अलावा, विपक्षी दल गत 20 जुलाई को राजधानी दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से सदन के भीतर बयान देने की अपनी मांग पर पूरी तरह अड़े रहे और सरकार के खिलाफ अपना विरोध जारी रखा।