सरकार ने उसके कामकाज की गहन जांच आगे बढ़ायी
भारतीय कानूनों के तहत जांच हो रही
माफी मांगने के बाद भी पूछताछ जारी
किसे क्या दिखाना है, यह किसकी जिम्मेदारी
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम के तहत मेटा की कानूनी स्थिति और उसकी जवाबदेही को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस बात की गहन समीक्षा की जा रही है कि क्या मेटा की एल्गोरिथम पर आधारित सिफारिशी प्रणाली और पैसों के बदले सामग्री को बढ़ावा देने (पेड कंटेंट प्रमोशन) की नीति, भारतीय कानूनों के अंतर्गत एक मध्यस्थ की परिभाषा और उसकी शर्तों के अनुकूल है या नहीं।
यह विवाद सरकारी अधिकारियों और मेटा के प्रतिनिधियों के बीच हुई कई दौर की उच्च-स्तरीय बैठकों के दौरान सामने आया। केंद्र सरकार ने इस बात पर गंभीर सवाल उठाए हैं कि क्या कोई ऐसा मंच जो सक्रिय रूप से यह निर्धारित करता है कि उपयोगकर्ताओं को क्या देखना चाहिए, वह आईटी अधिनियम के तहत मध्यस्थों को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा और छूट का हकदार बना रह सकता है। यदि कोई मंच खुद यह तय करता है कि उपयोगकर्ताओं को कौन सी सामग्री दिखाई जाएगी, तो यह सीधे तौर पर सामग्री के प्रकाशन के समान माना जाता है, ऐसी स्थिति में मंचों को अपने कृत्यों और परिणामों की पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी।
यदि कोई प्लेटफॉर्म इन दायित्वों का पालन करने में विफल रहता है, तो वह धारा 79 के तहत मिलने वाली छूट को खो सकता है। इसके अलावा, आईटी अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता सहित अन्य लागू कानूनों के तहत उसके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
सरकार की प्रमुख चिंताओं में से एक यह थी कि एआई-जनित हानिकारक सामग्री को फ्लैग किए जाने के बावजूद वह बार-बार कैसे सामने आ रही है, उसका निरंतर प्रसार हो रहा है और वह वायरल हो रही है। सरकार ने यह सवाल भी उठाया कि जब आईटी नियमों के तहत सिंथेटिक सामग्री की पहचान करना और उस पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य किया गया है, तब बिना लेबल वाले एआई-जनित वीडियो अभी भी सोशल मीडिया पर कैसे दिखाई दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक फेसबुक पोस्ट पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने के बाद सरकार द्वारा तलब किए जाने के बाद, मेटा के ग्लोबल अफेयर्स हेड जोएल कपलन के नेतृत्व में कंपनी के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार और गुरुवार को आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव और आईटी सचिव एस कृष्णन से मुलाकात की थी। कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक आशुतोष रांका ने आरोप लगाया है कि मेटा ने भारत में उनके चार वीडियो को प्रतिबंधित कर दिया है। इन वीडियो में कथित तौर पर एक वह वीडियो भी शामिल था जिसमें पुलिस जंतर-मंतर पर लोगों तक खाना पहुंचने से रोकती हुई दिखाई दे रही थी, और दूसरा वीडियो जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को जबरन उठाए जाने से संबंधित था।