संविदा कर्मचारियों को भी मिलेगी 720 दिन की चाइल्ड केयर लीव: MP हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, अवमानना पर अधिकारी पर ₹50,000 का जुर्माना
जबलपुर (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने संविदा कर्मचारियों के अधिकारों के पक्ष में एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि नियमित (रैगुलर) कर्मचारियों की भांति संविदा (Contractual) कर्मचारियों को भी ‘चाइल्ड केयर लीव’ (Child Care Leave – CCL) की पूरी पात्रता है। संविदा कर्मचारी अपनी संपूर्ण सेवा अवधि के दौरान आवश्यकता पड़ने पर अधिकतम 720 दिनों की चाइल्ड केयर लीव ले सकते हैं। हालांकि, खंडवा में पदस्थ एक संविदा कर्मचारी आयशा शेख के मामले में हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में 9 बार स्पष्ट आदेश जारी किए जाने के बावजूद संबंधित विभाग द्वारा आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए माननीय उच्च न्यायालय ने सक्षम प्रशासनिक अधिकारी पर ₹50,000 का अर्थदंड (जुर्माना) आरोपित करते हुए कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से अवकाश स्वीकृत करने का आदेश दिया है।
🧬 बीमार बेटे की देखभाल हेतु आयशा शेख ने मांगी थी छुट्टी, दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है मासूम
यह संपूर्ण प्रकरण राज्य शिक्षा केंद्र में प्रोग्रामर के पद पर खंडवा में कार्यरत आयशा शेख से संबंधित है।
आयशा शेख का पुत्र एक अत्यंत गंभीर आनुवंशिक बीमारी ‘ड्यूचेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी’ (Duchenne Muscular Dystrophy) से ग्रसित है। यह एक ऐसी दुर्लभ और कष्टदायक स्थिति है, जिसमें पीड़ित व्यक्ति बिना किसी अन्य व्यक्ति की सहायता के बिस्तर से उठने या चलने-फिरने में भी पूरी तरह असमर्थ होता है। ऐसी स्थिति में पीड़ित बच्चे को 24 घंटे किसी न किसी के सतत सहारे और देखभाल की आवश्यकता होती है।
📜 सिविल सर्विस लीव रूल्स 1977 के तहत रेगुलर व संविदा दोनों को है CCL का अधिकार
आयशा शेख अपने गंभीर रूप से पीड़ित पुत्र की समुचित देखभाल करना चाहती थीं, जिसके लिए उन्होंने सर्वप्रथम वर्ष 2020 में औपचारिक रूप से चाइल्ड केयर लीव का आवेदन दिया था।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता निखिल तिवारी ने विधिक स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया, “चाइल्ड केयर लीव का स्पष्ट प्रावधान सिविल सर्विस लीव रूल्स 1977 के अंतर्गत किया गया है। यह अधिकार शासकीय सेवा में कार्यरत नियमित एवं संविदा दोनों श्रेणियों के कर्मचारियों को समान रूप से प्राप्त है। इसके तहत एक कर्मचारी अपने पूरे सेवा कार्यकाल के दौरान कुल 720 दिनों का अवकाश अपने बच्चों की देखभाल हेतु प्राप्त कर सकता है।”
🚫 सर्व शिक्षा अभियान ने नियमों में किया संशोधन, सामान्य प्रशासन विभाग के सर्कुलर का दिया तर्क
इसके विपरीत, सर्व शिक्षा अभियान मिशन ने इस नीतिगत नियम में मनमाना संशोधन करते हुए संविदा कर्मचारियों हेतु केवल 15 दिनों के पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) तथा 180 दिनों के मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) का ही प्रावधान किया था।
मिशन की ओर से चाइल्ड केयर लीव का कोई प्रावधान स्वीकृत नहीं किया गया। विभागीय अधिकारियों ने सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के 22 जुलाई 2023 के सर्कुलर का हवाला देते हुए तर्क प्रस्तुत किया था कि संविदा कर्मचारियों के लिए नियम पुस्तिका में पृथक से चाइल्ड केयर लीव का कोई उल्लेख नहीं है, अतः आवेदन निरस्त किया गया।
🏛️ 2020 में पहली बार खारिज हुआ था आवेदन, हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सरकार गई थी अपील में
आयशा शेख ने जब वर्ष 2020 में पहली बार अवकाश हेतु आवेदन प्रस्तुत किया था, तब उनके पुत्र की आयु लगभग 14 वर्ष थी और उसकी शारीरिक स्थिति अत्यधिक चिंताजनक हो चुकी थी।
विभागीय स्तर पर आवेदन खारिज होने के पश्चात आयशा शेख ने 2020 में राज्य शिक्षा केंद्र के आदेश को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी। प्रथम दृष्टया ही हाईकोर्ट ने आयशा के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए छुट्टी स्वीकृत करने का आदेश दिया था। किंतु, राज्य शिक्षा केंद्र और राज्य सरकार इस निर्णय के विरुद्ध खंडपीठ में अपील (Writ Appeal) में चली गई, जिसके कारण यह विषय वर्षों तक विचाराधीन रहा।
⚖️ सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला, शीर्ष अदालत ने भी राज्य सरकार की SLP की खारिज
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट की एकलपीठ के आदेश को WA क्रमांक 671/2021 के माध्यम से चुनौती दी थी, किंतु उच्च न्यायालय की डबल बेंच ने भी राज्य सरकार की अपील को निरस्त कर दिया।
तत्पश्चात मामला देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) तक पहुंचा। SLP (Civil) क्रमांक 2540/2022 की सुनवाई करते हुए माननीय उच्चतम न्यायालय ने हाईकोर्ट के निर्णय में हस्तक्षेप करने से साफ इंकार कर दिया और राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया।
⚠️ 9 बार आदेश के बावजूद नहीं मिली छुट्टी, अब हाईकोर्ट ने अधिकारी पर लगाया ₹50 हजार का जुर्माना
अधिवक्ता निखिल तिवारी ने बताया कि इस सिंगल मैटर में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा अब तक 9 बार अनुपालन के स्पष्ट आदेश जारी किए जा चुके हैं।
अदालती अवमानना के एक चरण में तो एक वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी को स्वयं न्यायालय के समक्ष उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराना पड़ा था। इसके बावजूद विभाग द्वारा आयशा शेख को छुट्टी प्रदान नहीं की गई। अधिकारियों की इस अडियल कार्यप्रणाली से क्षुब्ध होकर याचिकाकर्ता ने पुनः अवमानना याचिका दायर की, जिस पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित सक्षम अधिकारी पर ₹50,000 का व्यक्तिगत जुर्माना लगाते हुए तत्काल छुट्टी स्वीकृत करने का कड़ा निर्देश जारी किया है।


