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प्रधानमंत्री देश के युवाओं से माफी मांगेः राहुल गांधी

देश की पूरी शिक्षा व्यवस्था ही ध्वस्त कर दी गयी है

महाबलीपुरम में आयोजन चर्चा में शामिल

मौजूद शिक्षा प्रणाली की खामियां गिनायी

भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ी है यह सरकार

राष्ट्रीय खबर

चेन्नईः चेन्नई के समीप महाबलीपुरम में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अव्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाया है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट से उपजे हालिया विवादों और पेपर लीक की घटनाओं से प्रभावित अभिभावकों से मुलाकात के बाद, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि देश की मौजूदा शिक्षा प्रणाली में जो भ्रष्टाचार और खामियां हैं, उन्होंने न केवल मेधावी छात्रों के सपनों को चकनाचूर किया है, बल्कि पूरे परिवारों को गहरे अवसाद में धकेल दिया है।

महाबलीपुरम में आयोजित जिला कांग्रेस अध्यक्षों के 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के समापन के बाद, राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स के माध्यम से अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि अपने बच्चों को खोने वाले माता-पिता के आंसुओं से बड़ा कोई दर्द नहीं हो सकता। इन परिवारों का गम कभी कम नहीं होगा, लेकिन इसके साथ ही टूटी और भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। पेपर लीक और लगातार रद्द होती परीक्षाओं के कारण छात्रों की बरसों की मेहनत एक पल में मिट्टी में मिल गई है। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि एक ऐसा तंत्र जो खुद भ्रष्टाचार की नींव पर खड़ा है, वह छात्रों से पूरी ईमानदारी और कड़ी मेहनत की उम्मीद कैसे कर सकता है।

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि श्री मोदी अक्सर छात्रों को माफ करने या उन्हें समझाने की बातें करते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि उन्होंने आज तक न तो किसी शोकाकुल परिवार से मुलाकात की है और न ही किसी ऐसे पीड़ित छात्र का दुख सुना है जिसका भविष्य इस सिस्टम ने छीन लिया है। राहुल गांधी के अनुसार, भारत के छात्रों को प्रधानमंत्री से किसी तरह की क्षमा नहीं चाहिए, बल्कि प्रधानमंत्री को स्वयं उन लाखों छात्रों और उनके परिवारों से माफी मांगनी चाहिए, जिनकी उम्मीदें सिस्टम की विफलता की भेंट चढ़ गईं। उन्होंने मांग की कि सरकार इस बिगड़ती व्यवस्था की जिम्मेदारी ले और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठाए, ताकि भविष्य में किसी भी युवा को इन दुश्वारियों का सामना न करना पड़े।