ईस्टर बम धमाकों की सुनवाई केबाद अदालत का फैसला
दोनों को हमले की पूर्व सूचना मिली थी
जानकारी के बाद भी कार्रवाई नहीं की
श्रीलंका में फांसी देने का रिवाज नहीं
एजेंसियां
कोलंबोः श्रीलंका की एक अदालत ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दो वरिष्ठ पूर्व रक्षा अधिकारियों को मौत की सजा सुनाई है। यह मामला वर्ष 2019 में ईस्टर संडे के दिन हुए उन भयानक आतंकी हमलों से जुड़ा है, जिन्होंने पूरे देश को दहला दिया था। अदालत ने इन अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी निभाने में घोर लापरवाही बरतने और हमलों को रोकने में विफल रहने का दोषी पाया है।
मामले की पृष्ठभूमि और जिम्मेदारी दोषी ठहराए गए व्यक्तियों में श्रीलंका के पूर्व पुलिस महानिरीक्षक पुजित जयसुंदरा और पूर्व रक्षा सचिव हेमासिरी फर्नांडो शामिल हैं। अदालत ने पाया कि इन दोनों अधिकारियों के पास हमलों से जुड़ी खुफिया जानकारी पहले ही पहुँच चुकी थी, जिसमें स्पष्ट रूप से कैथोलिक चर्चों को निशाना बनाए जाने की चेतावनी दी गई थी। बावजूद इसके, इन अधिकारियों ने समय रहते आवश्यक सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए, जिसके कारण यह त्रासदी घटी।
वर्ष 2019 के इन आत्मघाती हमलों में कुल 268 निर्दोष लोगों की जान गई थी। हमलों के निशाने पर तीन प्रमुख चर्च और दो बड़े होटल थे, जहाँ श्रद्धालु और विदेशी पर्यटक मौजूद थे। इस घटना में 600 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए थे। इन हमलों को इस्लामिक चरमपंथियों द्वारा अंजाम दिया गया था और इसका आरोप इस्लामिक स्टेट (IS) पर लगाया गया था, हालांकि इस आतंकी संगठन की सीधी संलिप्तता के ठोस सबूत आज भी जांच का विषय बने हुए हैं।
कानूनी स्थिति और सजा का स्वरूप अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा पर फिलहाल एक तकनीकी कानूनी पेच फंसा हुआ है। चूँकि श्रीलंका में वर्तमान में मृत्युदंड को लागू नहीं किया जाता है, इसलिए कानूनी प्रावधानों के अनुसार इन अधिकारियों की सजा को स्वतः ही आजीवन कारावास में परिवर्तित कर दिया गया है। यह निर्णय पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि इसने उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की है।