बस्तर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य बस्तर अंचल में सरकारी राशन सामग्रियों की कालाबाजारी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
जनसमस्याओं और प्रशासनिक शिकायतों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए खाद्य विभाग की टीम ने बीते 3 दिनों के भीतर लगातार दूसरी बड़ी दंडात्मक कार्रवाई को अंजाम दिया है। खाद्य विभाग की इस त्वरित छापेमारी में 378 बोरी सरकारी चावल और 6 बोरी चना सहित एक मालवाहक ट्रक को मौके से जब्त किया गया है।
🚚 जगदलपुर के अनुपमा चौक पर खाद्य विभाग का छापा, गोदाम और ट्रक से मिला सरकारी खाद्यान्न
जिला खाद्य अधिकारी घनश्याम राठौर ने कार्रवाई का विवरण देते हुए बताया कि खाद्य विभाग को विश्वसनीय मुखबिर से गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी।
सूचना के आधार पर जगदलपुर शहर के अनुपमा चौक स्थित भवानी चाट भंडार के पीछे बाड़े में मौजूद एक अवैध गोदाम की घेराबंदी कर जांच की गई। जांच-पड़ताल के दौरान दुकान और गोदाम परिसर में भारी मात्रा में सरकारी चावल एवं चने का अवैध भंडारण पाया गया। इतना ही नहीं, दुकान के ठीक सामने एक बड़ा ट्रक खड़ा था, जिसमें सरकारी चावल के बोरों को तेजी से लोड किया जा रहा था।
📦 3 क्विंटल चना और 100 बारदाने भी बरामद, जवाहर वार्ड राशन दुकान की सुपुर्दगी में दी गई सामग्री
खाद्य अधिकारी ने आगे बताया कि पूरी जांच प्रक्रिया के दौरान दुकान और ट्रक से मिलाकर कुल 378 बोरा पकाने योग्य सरकारी चावल बरामद किया गया।
इसके साथ ही 6 बोरा चना (जिसका कुल वजन लगभग 3 क्विंटल है) और 100 बोरा सरकारी राशन के प्रयुक्त बारदाने (Jute Bags) जब्त किए गए हैं। इन सभी जब्त राशन सामग्रियों को सील कर जवाहर वार्ड स्थित शासकीय उचित मूल्य की दुकान की सुपुर्दगी में सौंप दिया गया है।
इसके अतिरिक्त, खाद्यान्न से लोड हो रहे ट्रक (क्रमांक CG 04 LC 9409) को जब्त कर सुरक्षा की दृष्टि से सिटी कोतवाली जगदलपुर की अभिरक्षा में दे दिया गया है। कड़ी पूछताछ के दौरान गोदाम मालिक मोहम्मद जिलानी ने स्वीकार किया कि वह स्थानीय हाट-बाजारों और फुटकर बिक्रेताओं से कम दाम में सरकारी राशन खरीदकर बड़े व्यापारियों को महंगे दामों में बेचता था।
🚔 खाद्य विभाग की 3 दिनों में दूसरी बड़ी कार्रवाई, बस्तर में राशन माफियाओं का नेटवर्क उजागर
उल्लेखनीय है कि महज तीन दिन पूर्व ही खाद्य विभाग की टीम ने एक पिकअप वाहन से अवैध रूप से परिवहन किया जा रहा 80 बोरी सरकारी चावल जब्त किया था, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग ₹1.50 लाख बताई गई थी।
लगातार 3 दिनों में हुई इन दो बैक-टू-बैक कार्रवाइयों से यह पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है कि बस्तर संभाग में गरीबों के लिए आने वाले सरकारी राशन की कालाबाजारी एक संगठित और बड़े नेटवर्क के जरिए लंबे समय से की जा रही थी, जिस पर अब पुलिस व खाद्य विभाग शिकंजा कस रहा है।