नरवाना/जींद (हरियाणा): सावन महीने की पहली ही मूसलाधार बारिश ने जहां एक तरफ क्षेत्रवासियों को भीषण गर्मी और उमस से बड़ी राहत दी, वहीं दूसरी तरफ नगर परिषद के जल निकासी के तमाम दावों और तैयारियों की हवा निकालकर रख दी।
महज कुछ ही देर की तेज बारिश के कारण नरवाना शहर की मुख्य सड़कें, चौराहे और व्यावसायिक बाजार पूरी तरह पानी में डूब गए। हालात इतने विकराल हो गए कि राहगीरों को अपने छोटे-छोटे बच्चों को कंधों पर बैठाकर जलभराव वाली खतरनाक सड़कों को पार करने के लिए मजबूर होना पड़ा। यह खौफनाक मंजर शहर की बदहाल जल निकासी व्यवस्था पर बड़ा प्रशासनिक सवाल खड़ा कर रहा है।
🌊 घुटनों तक पानी भरने से थमा शहर की रफ्तार, बाजारों में दुकानों के बाहर भरा बरसाती पानी
उल्लेखनीय है कि सावन की इस पहली मूसलाधार बारिश ने पूरे नरवाना शहर को पूरी तरह तरबतर कर दिया।
बारिश थमने के बाद भी शहर की प्रमुख सड़कों और व्यस्त बाजारों में कई घंटों तक घुटनों तक बरसाती पानी जमा रहा, जिससे आमजन और वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हो गई। सड़कों पर पानी जमा होने से दुकानदारों के व्यापार पर असर पड़ा और राहगीरों को आवागमन में भारी परेशानियों से दो-चार होना पड़ा।
🪪 कंधों पर मासूमों को लादकर सड़क पार करने को मजबूर लोग, अव्यवस्था की हकीकत आई सामने
सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरों में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि जलभराव इतना गहरा था कि एक व्यक्ति स्कूली बच्चों को सुरक्षित निकालने के लिए उन्हें अपने कंधों पर बैठाकर उफनती सड़क पार करा रहा है।
यह दृश्य केवल एक दिन की बारिश का नहीं, बल्कि नरवाना नगर परिषद की वर्षों से चली आ रही बदहाल और लापरवाह जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल रहा है। हालांकि बारिश ने लोगों को उमस भरी गर्मी से तात्कालिक राहत जरूर दी, लेकिन इस जलभराव ने आम जनता की दैनिक दिनचर्या को अस्त-व्यस्त कर दिया।
😡 “हर बारिश में बनते हैं यही हालात, नहीं होता स्थायी समाधान”: स्थानीय दुकानदारों व निवासियों में रोष
स्थानीय दुकानदारों, व्यापारियों और निवासियों का कहना है कि हर साल मानसून की बारिश में शहर के यही बदहाल हालात बन जाते हैं।
नालों की समय पर सही तरीके से सफाई न होने और निकासी का कोई पुख्ता इंतजाम न होने के कारण थोड़ा सा पानी गिरते ही सड़कें तालाब का रूप ले लेती हैं। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि केवल कागजी दावे करने के बजाय धरातल पर नरवाना की जल निकासी व्यवस्था का स्थायी समाधान किया जाए।