कैथल/चंडीगढ़: हरियाणा के अन्नदाता किसानों पर एक बार फिर गंभीर प्राकृतिक और जैविक संकट मंडराने लगा है। प्रदेश के कैथल जिला सहित कई प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्रों में ‘फिजी वायरस’ (Southern Rice Black-streaked Dwarf Virus) का प्रकोप बेहद तेजी से फैल रहा है।
इस जानलेवा वायरस के भीषण हमले से अकेले कैथल और आसपास के कई इलाकों में करीब 1,500 एकड़ से अधिक रकबे में खड़ी धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। खेतों में पौधे पूरी तरह बौने रह गए हैं और उनमें बालियां नहीं निकल पा रही हैं, जिसके कारण किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
🐛 ‘सफेद पीठ वाले तेले’ से फैल रहा है वायरस, पौधे बौने होकर समय से पहले ही जा रहे सूख
कृषि वैज्ञानिकों और कीट विशेषज्ञों के अनुसार, यह फिजी वायरस मुख्य रूप से ‘व्हाइट बैक्ड प्लांट हॉपर’ (सफेद पीठ वाले तेले) नामक कीट के माध्यम से एक खेत से दूसरे खेत में तेजी से फैलता है।
इस वायरस से संक्रमित धान के पौधे अपनी सामान्य शारीरिक लंबाई नहीं पकड़ पाते और बौने (Dwarf) ही रह जाते हैं। इसके साथ ही पौधों की जड़ें काली पड़ जाती हैं और उनमें बालियां नहीं निकलतीं। बालियां न बनने के कारण पूरी फसल पकने से पहले ही सूखकर पूरी तरह नष्ट हो जाती है।
🌾 किसानों ने सरकार से की तुरंत विशेष गिरदावरी और मुआवजे की मांग, HAU के वैज्ञानिकों ने संभाला मोर्चा
धान की लहलहाती फसल आंखों के सामने बर्बाद होने से आक्रोशित और बेहद चिंतित किसानों ने राज्य सरकार से प्रभावित इलाकों में तुरंत विशेष गिरदावरी कराकर उचित आर्थिक मुआवजे की मांग की है।
वहीं, मामला शासन और प्रशासन के संज्ञान में आने के बाद कृषि विभाग और चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU), हिसार के कृषि वैज्ञानिकों की संयुक्त टीमों ने प्रभावित खेतों का धरातलीय दौरा करना शुरू कर दिया है। कृषि अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि वे घबराने के बजाय कृषि विशेषज्ञों के परामर्श से अनुशंसित कीटनाशकों का सही मात्रा में छिड़काव करें।