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जंतर मंतर पर सीजेपी का आंदोलन समाप्त हुआ

सरकार के साथ अगली वार्ता चार सप्ताह के बाद होगी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा में धांधली और पेपर लीक विवाद को लेकर पिछले 36 दिनों से जारी अभूतपूर्व गतिरोध और विरोध प्रदर्शनों पर शनिवार को आखिरकार विराम लग गया। केंद्र सरकार द्वारा प्रदर्शनकारी संगठन कॉकरोच जनता पार्टी की सभी प्रमुख शर्तों और मांगों को पूर्ण रूप से स्वीकार किए जाने के बाद संगठन ने अपना राष्ट्रव्यापी आंदोलन वापस लेने का आधिकारिक ऐलान किया। सरकार द्वारा स्वीकार की गई मांगों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पद से त्यागपत्र और आंदोलनरत छात्रों व प्रदर्शनकारियों पर दर्ज प्राथमिकियों को रद्द करना मुख्य रूप से शामिल है।

समझौते की घोषणा करते हुए केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने सरकार का पक्ष रखते हुए देश को आश्वस्त किया कि नीट परीक्षा के निरस्त होने से उत्पन्न मानसिक तनाव के कारण जिन छात्रों ने दुर्भाग्यवश आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाया, उनके पीड़ित परिवारों को तय नियमानुसार सम्मानजनक आर्थिक मुआवजा प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान विद्यार्थियों व अन्य कार्यकर्ताओं पर दर्ज की गई सभी प्राथमिकियों को बिना शर्त वापस लिया जाएगा। सीजेपी के प्रतिनिधियों ने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और संपूर्ण परीक्षा प्रणाली में व्यापक ढांचागत सुधारों की स्पष्ट रूपरेखा तैयार करने के लिए चार सप्ताह (एक माह) के भीतर सरकार और आंदोलनकारी प्रतिनिधियों के बीच दूसरे दौर की उच्चस्तरीय वार्ता आयोजित की जाएगी।

इससे पूर्व शनिवार को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नीट पेपर लीक विवाद की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि यह मुद्दा उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा या अहम का विषय नहीं है।

धर्मेंद्र प्रधान ने व्यथित मन से कहा कि पिछले 10 दिनों में जिस प्रकार की परिस्थितियां निर्मित हुई हैं, उससे वे बेहद आहत हैं और इसी वजह से उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है। उन्होंने स्मरण कराया, मैंने पहले दिन से ही नीट पेपर लीक मामले की नैतिक जिम्मेदारी ली थी। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्र को सचेत करते हुए कहा कि जंतर-मंतर और देश के अलग-अलग हिस्सों में बने संवेदनशील माहौल का अनुचित लाभ उठाने की इजाजत राष्ट्रविरोधी ताकतों को किसी भी कीमत पर नहीं दी जानी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि धर्मेंद्र प्रधान का यह त्यागपत्र जंतर-मंतर पर सीजेपी के बैनर तले आयोजित लंबे और उग्र प्रदर्शनों का सीधा परिणाम है। प्रदर्शनकारी परीक्षार्थी नीट-यूजी 2026 पेपर लीक, सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रक्रिया में उजागर हुई कथित धांधली और देश की सभी प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन में क्रांतिकारी सुधारों की पुरजोर मांग कर रहे थे।