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चंदे से विशाल और प्राचीन झील को किया पुनर्जीवित

सरकारी उपेक्षा से नाराज लोगों ने जिम्मेदारी खुद उठायी

  • चोल राजवंश के काल की झील है यह

  • दस गांवों की खेती इस पर निर्भर थी

  • पांच हजार एकड़ की खेती होती है यहां

राष्ट्रीय खबर

चेन्नईः तंजावुर जिले के निवासियों ने गुरुवार को क्राउडफंडिंग (जनसहयोग) के माध्यम से कल्लापेरंबूर में स्थित 642 एकड़ की ऐतिहासिक सेंगझुनीर झील को पुनर्जीवित करने का काम शुरू किया है। इस झील में कम से कम 1.50 टीएमसी पानी जमा करने की क्षमता है, जिससे जिले के लगभग 10 गांवों की कृषि भूमि की सिंचाई की जा सकेगी।

चोल राजवंश के काल की यह सिंचाई झील तंजावुर और बुदालुर के बीच स्थित है। इसके माध्यम से कल्लापेरंबूर, रायंतूर, थेननांगुडी, पिल्लैयारनाथम, सीरालुर और सक्करासामंथाराम सहित 10 से अधिक गांवों की खेती होती थी। यह झील क्षेत्र की कृषि व्यवस्था की रीढ़ थी, जिससे 3,000 एकड़ भूमि की प्रत्यक्ष और 2,000 एकड़ भूमि की अप्रत्यक्ष रूप से सिंचाई होती थी। हालांकि, समय के साथ देखरेख के अभाव में झील उपेक्षित हो गई। अत्यधिक गाद (सिल्ट) जमा होने, अवैध कब्जों और जंगली वनस्पतियों तथा बबूल के पेड़ों के घने जाल के कारण यह विशाल 642 एकड़ की झील सिकुड़कर मात्र 200 एकड़ में तब्दील हो गई थी।

इस महत्वपूर्ण जलस्रोत को बचाने के लिए स्थानीय किसानों ने साल 2018 में सेंगझुनीर लेक अयाकटदार वेलफेयर एसोसिएशन का गठन किया था। शुरुआती दौर में उन्होंने झील के बांध की 10 किलोमीटर तक मरम्मत भी की, लेकिन कोविड-19 महामारी और अन्य बाधाओं के कारण काम रुक गया। इस साल पानी की भारी किल्लत के कारण जब किसान अपनी धान की खेती शुरू नहीं कर पाए, तो उनके सब्र का बांध टूट गया। उन्होंने खुद इस संकट से निपटने का फैसला किया और स्थानीय निवासियों के बीच एक व्यक्ति, एक लीटर डीजल दान करे नाम से एक अनूठा अभियान शुरू किया।

जनता के इस जज्बे को देखकर जनप्रतिनिधि भी आगे आए। तंजावुर के सांसद एस. मुरासोली ने 1 लाख और तंजावुर के टीवीके विधायक आर. सरवनन ने 50,000 का व्यक्तिगत दान दिया, जिसके बाद गुरुवार से काम युद्ध स्तर पर शुरू हो गया। एसोसिएशन के समन्वयक के. रविचंद्रन ने कहा, यह चोल राजाओं द्वारा निर्मित एक प्राचीन झील है, जो लोक कल्याण और बेहतरीन सिंचाई प्रबंधन के लिए जाने जाते थे। तंजावुर में सिंचाई के पानी के गंभीर संकट को देखते हुए हमने इसे पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया है।

उन्होंने बताया कि शुरुआती चरण में झील के बांधों को मजबूत करने और उगे हुए बबूल के पेड़ों को हटाने का काम किया जा रहा है। कई लोगों ने इस अभियान के लिए आर्थिक मदद दी है और कई अन्य ने वित्तीय सहायता का भरोसा दिलाया है। एक बार काम पूरा होने के बाद यह न केवल सिंचाई संकट को दूर करेगी, बल्कि क्षेत्र के गिरते भूजल स्तर को रिचार्ज करने में भी वरदान साबित होगी।