एसआईटी जांच रिपोर्ट के खास हिस्से अब सार्वजनिक हुए
राष्ट्रीय खबर
लखनऊः अयोध्या में राम मंदिर के दान प्रबंधन में हुए कथित घोटाले की जांच कर रही विशेष जांच टीम ने रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की भूमिका पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। जांचकर्ताओं ने गंभीर प्रक्रियात्मक अनियमितताओं की ओर इशारा किया है, जिसके कारण बिना किसी औपचारिक प्राधिकरण के टिन्नू को मंदिर की दान संग्रह प्रणाली पर व्यापक नियंत्रण हासिल हो गया था। रिपोर्ट के अनुसार, टिन्नू श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के एक प्रतिनिधि के रूप में काम कर रहा था और उसके पास राम मंदिर परिसर में विभिन्न स्थानों पर स्थापित हुंडियों (दान पेटियों) की चाबियां थीं। हालांकि, जांच में यह पाया गया कि इतनी संवेदनशील जिम्मेदारी सौंपने के लिए ट्रस्ट की ओर से कोई लिखित आदेश, आधिकारिक अधिसूचना या औपचारिक प्राधिकरण पत्र जारी नहीं किया गया था।
एसआईटी ने इस व्यवस्था को एक बड़ी प्रशासनिक लापरवाही माना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि करोड़ों रुपये के सार्वजनिक दान को संभालने वाली प्रणाली में किसी व्यक्ति को बिना दस्तावेजी अधिकार, निर्धारित जवाबदेही या संस्थागत निरीक्षण के चाबियां सौंपना पूरी तरह अनुचित था। इस तरह की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी औपचारिक आदेशों, समय-समय पर होने वाले ऑडिट और स्पष्ट रूप से तय जवाबदेही के तहत होनी चाहिए थी।
जांचकर्ताओं का आरोप है कि टिन्नू ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने एक रिश्तेदार, मनीष कुमार यादव, को मंदिर की अत्यधिक संवेदनशील दान-गणना टीम में शामिल करवा दिया। रिपोर्ट के अनुसार, टिन्नू की सिफारिश पर मनीष को नकदी गिनने के काम में लगाया गया, जिससे उसे सीधे नकदी तक पहुंच मिल गई। रिपोर्ट के अनुसार, इसी सिफारिश के कारण मनीष को दान राशि के गबन और हेराफेरी में शामिल होने का अवसर मिला।
टिन्नू की भूमिका की जांच के अलावा, जांच दल ने नकदी की गिनती की प्रक्रिया में कई सुरक्षा खामियों को भी उजागर किया है: सीसीटीवी कैमरों की पर्याप्त और उचित निगरानी नहीं की जा रही थी। ऑडिट की सिफारिशों के तहत सीसीटीवी फुटेज को 180 दिनों तक सुरक्षित रखना अनिवार्य था, लेकिन नियमों का उल्लंघन करते हुए इसे 45 दिनों से अधिक सुरक्षित नहीं रखा गया। नकदी की गिनती करने वाले कर्मियों की तैनाती और उनके निरीक्षण को लेकर तय किए गए अनिवार्य बैंक प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया।
याद दिला दें कि गत 15 जून को जब एसआईटी पहली बार अयोध्या पहुंची, तब टिन्नू सार्वजनिक रूप से इन आरोपों का जवाब देने वाला पहला आरोपी था। उसने मीडिया और सोशल मीडिया पर 50 करोड़ रुपये की संपत्ति होने के दावों को निराधार और भ्रामक बताया। उसका कहना था कि उसने यह जमीन राम मंदिर परियोजना शुरू होने से बहुत पहले, साल 2008 में पंजीकृत बिक्री विलेख के जरिए खरीदी थी। बाद में इस इमारत को एलएंडटी और मंदिर निर्माण में लगी अन्य कंपनियों के कर्मचारियों को किराए पर दिया गया था, जिससे होने वाली आय वैध है।