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कुछ दिनों की छुट्टी पर जाएगा मॉनसून

भारतीय मौसम वैज्ञानिकों ने फिर से दी नई चेतावनी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी जारी की है कि जुलाई की शुरुआत से देश भर में सक्रिय दक्षिण-पश्चिम मानसून मध्य जुलाई से कमजोर पड़ सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति मजबूत होने के कारण मानसून के इस चरण में सुस्ती देखने को मिलेगी। यह पूर्वानुमान लगातार नौ दिनों तक हुई सामान्य से अधिक भारी बारिश के बाद आया है, जिसने देश में वर्षा की कमी को दूर करने और खरीफ फसलों की बुआई में महत्वपूर्ण मदद की थी। आईएमडी के पूर्वानुमान के मुताबिक, मानसून के कमजोर चरण में प्रवेश करने से महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और केरल के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, बिहार, झारखंड और असम जैसे राज्यों में इस सुस्ती के चलते तापमान में वृद्धि देखी जा सकती है।

हालांकि, देशव्यापी मंदी के बावजूद क्षेत्रीय स्तर पर कुछ स्थानों पर भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने तमिलनाडु के कोयंबटूर और नीलगिरी जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जबकि पश्चिमी घाट के अन्य जिलों में मध्यम वर्षा की उम्मीद है। वर्तमान में दक्षिण गुजरात से लेकर उत्तरी केरल तक एक ट्रफ रेखा सक्रिय है, जिसके कारण 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। चेन्नई और उसके आसपास के इलाकों में हल्की बारिश और गरज के साथ छींटे पड़ सकते हैं।

प्रशासन ने पहाड़ी क्षेत्रों के अधिकारियों और निवासियों को भूस्खलन, पेड़ गिरने और जलभराव के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है। इसके साथ ही, अंडमान सागर, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के लिए समुद्री चेतावनी जारी की गई है, जहाँ हवा की गति 65 किमी प्रति घंटे तक पहुँच सकती है। मछुआरों को सुरक्षा के लिहाज से इन क्षेत्रों में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है।

कृषि पर प्रभाव और वैज्ञानिक कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह शुष्क दौर लंबा खिंचता है, तो प्रमुख राज्यों में खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो सकती है। हालांकि, मौसम विज्ञानियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि मानसून के चक्र में सक्रिय और कमजोर चरणों का आना एक सामान्य प्रक्रिया है। इस बार मानसून की सुस्ती का मुख्य कारण अल नीनो का मजबूत होना है, जो प्रशांत महासागर के पानी को गर्म कर भारत की ओर आने वाली नमी के प्रवाह को बाधित करता है। साथ ही, मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन भी एक ऐसे चरण में प्रवेश कर रहा है जो व्यापक बारिश के अनुकूल नहीं है, जिससे बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना कम हो गई है।