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सिंधु जल संधि के रुख में बदलाव नहीः भारत

पाकिस्तान द्वारा हमले की धमकी दिये जाने के बाद बयान

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः पाकिस्तान द्वारा दी जा रही धमकियों का जवाब देते हुए भारत ने कहा है कि सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान के आक्रामक रुख का भारत के उस फैसले पर कोई असर नहीं पड़ेगा, जिसके तहत सीमा पार आतंकवाद को रोकने तक इस संधि को स्थगित रखने का निर्णय लिया गया है।

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुए आतंकवादी हमले में 26 पर्यटकों के मारे जाने के बाद जब से भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया है, तब से पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने यह झूठ फैला रहा है कि भारत का यह फैसला उन देशों के लिए एक खतरनाक मिसाल कायम करता है जो साझा नदियों का पानी साझा करते हैं।

इसके जवाब में, विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को याद दिलाया कि जब तक वह सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक कुछ भी नहीं बदलेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने संवाददाताओं से कहा, सिंधु जल संधि पर भारत का रुख सुसंगत और स्पष्ट है। पाकिस्तान द्वारा सीमा पार आतंकवाद को लगातार प्रायोजित किए जाने के जवाब में यह संधि स्थगित है। पाकिस्तान को सीमा पार आतंकवाद के लिए अपने समर्थन को विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से त्यागना होगा।

सिंधु जल संधि के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करने के पाकिस्तान के हालिया प्रयास के तहत, वहां के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने इस सप्ताह के शुरू में एक कम उपस्थिति वाले कार्यक्रम में कहा था कि उनका देश इस संधि को स्थगित रखने के भारत के फैसले को खारिज करता है और यह संधि वैध, बाध्यकारी और प्रभावी बनी हुई है।

उसी कार्यक्रम में, पाकिस्तान के पूर्व मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने सिंधु जल संधि पर बात करते हुए परमाणु विकल्प शब्द का इस्तेमाल किया, जिसे रणनीतिक विशेषज्ञों ने गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी करार दिया है। बिलावल ने कहा, पाकिस्तान के परमाणु बम केवल औपचारिक उद्देश्यों के लिए नहीं हैं। यदि सिंधु जल संधि को बहाल करने के सभी प्रयास विफल हो जाते हैं, तो पाकिस्तान को परमाणु विकल्प तलाशना होगा।

पिछले साल भी भारत ने कहा था कि जब तक यह संधि स्थगित है, तब तक भारत इसके तहत अपने किसी भी दायित्व को पूरा करने के लिए बाध्य नहीं है। विदेश मंत्रालय ने जून 2025 में कहा था, कोई भी मध्यस्थता अदालत (कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन), कानून की नजर में अस्तित्वहीन इस अवैध रूप से गठित संस्था की तो बात ही छोड़िए, एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए भारत के कदमों की वैधता की जांच करने का अधिकार क्षेत्र नहीं रखती है।

विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई यह सिंधु जल संधि 1960 से भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के वितरण और उपयोग को नियंत्रित करती आ रही है। दोनों पड़ोसियों ने नौ साल की बातचीत के बाद इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।