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कुर्द बहुल इलाकों में विद्रोह की नई आहट

ईस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्स के लिए नई परेशानी

एजेंसियां

तेहरानः ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को इन दिनों देश के पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में हिंसा की एक नई और खतरनाक लहर का सामना करना पड़ रहा है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से कुर्द आबादी वाला है, जहाँ लंबे समय से सुलग रही असंतोष की आग अब फिर से भड़कती हुई नजर आ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम इस बात का संकेत हो सकता है कि कुर्द विद्रोह एक अधिक सक्रिय चरण में प्रवेश कर रहा है, जो तेहरान और वाशिंगटन के बीच चल रही नाजुक कूटनीतिक वार्ताओं के बीच नई चुनौतियां पेश कर रहा है।

हाल के दिनों में, ईरान के विभिन्न सीमावर्ती शहरों में सुरक्षा बलों पर लगातार हमले हुए हैं। जेरूसलम पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक ही दिन में दो अलग-अलग सशस्त्र हमलों में कम से कम चार सुरक्षाकर्मी मारे गए और कई घायल हुए। तस्नीम न्यूज (IRGC के करीबी ईरानी मीडिया) ने पुष्टि की है कि करमानशाह प्रांत के पावेह शहर में हुए एक सशस्त्र हमले में दो रिवोल्यूशनरी गार्ड्स मारे गए। इसी प्रकार, बानेह शहर में एक पुलिस चौकी पर हुए घातक हमले में दो पुलिस अधिकारियों की जान गई और एक तीन साल की बच्ची सहित तीन अन्य लोग घायल हो गए। हिंसा का यह दायरा अब पावेह, मारिवान और महाबाद जैसे शहरों तक फैल चुका है।

इन हमलों की जिम्मेदारी एक अपेक्षाकृत अज्ञात सशस्त्र समूह ज़ोर हेवा या सन ऑफ होप ने ली है। समूह का कहना है कि यह कार्रवाई 2022 में कुर्द महिला महसा अमिनी की हिरासत में हुई मौत के बाद ईरान सरकार द्वारा किए गए क्रूर दमन का बदला है। महसा अमिनी की मौत ईरान की तथाकथित नैतिकता पुलिस द्वारा हिजाब नियमों के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तारी के बाद हुई थी, जिसने पूरे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया था। कुर्दों को मध्य पूर्व में सबसे बड़े राज्यविहीन जातीय समूहों में से एक माना जाता है, जो ईरान, इराक, सीरिया और तुर्की में फैले हुए हैं। ईरान के पहाड़ी पश्चिम और उत्तर-पश्चिम में रहने वाले कुर्द लंबे समय से तेहरान पर राजनीतिक दमन, जबरन आत्मसात करने की नीतियों, फांसी देने और सैन्य अत्याचारों के आरोप लगाते रहे हैं।

यह तनाव ईरान की सीमाओं से परे भी महत्व रखता है। हाल के दिनों में, कुर्द विपक्षी समूहों को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर दबाव डालने के एक संभावित प्रेशर पॉइंट के रूप में देखा जा रहा था। हालांकि, अब कई कुर्द आवाजों को यह डर सता रहा है कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ती कूटनीति के बीच उन्हें अकेला छोड़ा जा सकता है। यदि अमेरिका ईरान के साथ अपने संबंधों को सुधारने के लिए कूटनीतिक रुख अपनाता है, तो ऐसे में कुर्द लड़ाके खुद को भू-राजनीतिक रूप से असुरक्षित महसूस कर सकते हैं।