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अयोध्या राम मंदिर दान घोटाला में एक और नई जानकारी

शौचालय में छिपाकर होती थी पैसों की तस्करी

राष्ट्रीय खबर

लखनऊ: अयोध्या पुलिस ने राम मंदिर दान राशि में कथित गबन के मामले की जांच का दायरा बढ़ा दिया है। गिरफ्तार आरोपी अविनाश शुक्ला द्वारा किए गए नए खुलासों से एक बेहद जटिल कार्यप्रणाली का पता चला है। इसके तहत कथित तौर पर चोरी की गई नकदी को पकड़े जाने से बचने के लिए पहले मंदिर परिसर के भीतर शौचालयों में छिपाया जाता था, और फिर धीरे-धीरे कम मात्रा में बाहर तस्करी कर दिया जाता था।

पुलिस द्वारा विशेष अदालत से अनुमति प्राप्त करने के बाद, मंगलवार को जिला जेल के भीतर लगभग दो घंटे की हिरासत में पूछताछ के दौरान ये खुलासे सामने आए। सूत्रों ने बताया कि जांचकर्ताओं ने शुक्ला का सामना जांच के दौरान एकत्र किए गए सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयानों और बरामदगी के रिकॉर्ड से कराया।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, शुक्ला ने कथित तौर पर जांचकर्ताओं को बताया कि संदिग्ध रैकेट के सदस्यों ने दान-गणना केंद्र के लेआउट का बारीकी से अध्ययन किया था, जिसमें सीसीटीवी कैमरों की स्थिति, प्रवेश और निकास मार्ग और कर्मचारियों की आवाजाही के पैटर्न शामिल थे। गिनती के दौरान कथित रूप से गायब की गई नकदी को पहले मंदिर परिसर के शौचालयों में छिपाया जाता था और बाद में शक से बचने के लिए समय-समय पर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बाहर निकाला जाता था।

जांचकर्ता अब परिसर के भीतर नकदी की आवाजाही के मार्ग को फिर से तैयार कर रहे हैं। शौचालयों के लिए जिम्मेदार स्वच्छता और रखरखाव कर्मचारियों से पूछताछ होने की संभावना है ताकि यह सत्यापित किया जा सके कि क्या उन्होंने कोई संदिग्ध गतिविधियां या पैसों के छिपे हुए पैकेट देखे थे। पुलिस ने कहा कि सीसीटीवी विश्लेषण, फोरेंसिक साक्ष्य और गवाहों के बयानों के माध्यम से इन आरोपों की पुष्टि की जाएगी।

जांच का मुख्य फोकस सीसीटीवी के ब्लाइंड स्पॉट्स (जहां कैमरे की नजर न पड़े) के कथित दुरुपयोग पर भी है। सूत्रों के अनुसार, जब एक आरोपी गिने हुए दान से नकदी निकालता था, तो अन्य आरोपी कैमरों के विजन को रोकने के लिए उसके आसपास खड़े हो जाते थे। वे एक तरह से मानव ढाल बनाकर चोरी को सर्विलांस से छिपा लेते थे।

पूछताछ में शुक्ला ने यह भी खुलासा किया कि अत्यधिक सुरक्षित दान-गणना कक्ष की दो चाबियों में से एक चाबी सह-आरोपी रमाशंकर यादव उर्फ ​​तिन्नू के पास रहती थी, जबकि नकदी गिनने में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। दूसरी चाबी गिनती की निगरानी करने वाले बैंक अधिकारियों के पास होती थी। पुलिस इन दावों को सत्यापित करने और यह पता लगाने के लिए कि क्या चाबी तक पहुंच ने गणना कक्ष में अनधिकृत प्रवेश को आसान बनाया, न्यायिक हिरासत में बंद तिन्नू से पूछताछ की तैयारी कर रही है।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से अब तक कुल 79.85 लाख रुपये नकद, 1,121 अमेरिकी डॉलर और सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए जा चुके हैं। सबसे बड़ी बरामदगी अविनाश शुक्ला से हुई है, जिसके पास से पुलिस ने 20.39 लाख रुपये, 1,121 अमेरिकी डॉलर, दो सोने की चेन, एक सोने की अंगूठी और एक चांदी के रंग की धातु की वस्तु जब्त करने का दावा किया है। पुलिस ने बताया कि सुभाष श्रीवास्तव के आवास से कोई बरामदगी नहीं हुई है।