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सोसायटी ऑफ सेंट पायस एक्स का बगावती कदम

पोप के आदेश के बिना नये विशप बनाये

एजेंसियां

एकोनः कैथोलिक चर्च के भीतर एक बार फिर गहरे मतभेद उभरकर सामने आए हैं। दशकों पहले 1988 में वैटिकन के साथ अलगाव की नींव रखने वाले अति-परंपरावादी समूह, सोसायटी ऑफ सेंट पायस एक्स (एसएसपीक्स) ने एक बार फिर पोप लियो चौदह के आदेशों की अवहेलना करते हुए नए बिशपों को नियुक्त करने का निर्णय लिया है। यह विवादास्पद कदम उस स्थान पर उठाया जा रहा है जहाँ से 38 साल पहले इसके संस्थापक मार्सेल लेफेवरे ने चार बिशपों का अभिषेक कर चर्च में दरार पैदा की थी। बुधवार को स्विट्जरलैंड के एकोन के खेतों में आयोजित होने वाले एक विशेष लैटिन मास (प्रार्थना सभा) में चार नए बिशपों का अभिषेक किया जाएगा, जिसमें दो फ्रांसीसी, एक अमेरिकी और एक स्विस शामिल हैं। इस समारोह में लगभग 15,000 अनुयायियों के जुटने की संभावना है।

पोप लियो चौदह ने सोमवार को समूह को संबोधित एक पत्र में भावुक अपील करते हुए कहा, मैं आपसे गिड़गिड़ाकर और पूरे दिल से प्रार्थना करता हूँ: कृपया पीछे हट जाएं! पोप ने इस कदम को एक विभाजनकारी कृत्य करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि ईसा मसीह के निर्बाध वस्त्र को फाड़ना अत्यंत गंभीर पाप है। सोसायटी ऑफ सेंट पायस एक्स, कट्टरपंथी कैथोलिकों का एक समूह है जो 1960 के दशक में वैटिकन द्वितीय परिषद द्वारा लागू किए गए उदारवादी सुधारों का कड़ा विरोध करता है। 1970 में फ्रांसीसी बिशप लेफेवरे द्वारा स्थापित यह संगठन आज भी चर्च की पुरानी परंपराओं, जैसे कि लैटिन में मास का आयोजन और पारंपरिक रीति-रिवाजों को अनिवार्य मानता है।

इस पूरे घटनाक्रम पर सोसायटी के सेमिनरी में धर्मशास्त्र के प्रोफेसर फादर मिशेल रयोन ने अपना बचाव करते हुए कहा, यह विद्रोह का कार्य नहीं है, यह चर्च के प्रति प्रेम से जन्मा कार्य है। सोसायटी का तर्क है कि उनके पास केवल दो बिशप बचे हैं, इसलिए नए बिशपों की नियुक्ति एक आवश्यकता है। वे रोम से किसी विशेष क्षेत्राधिकार की मांग नहीं कर रहे हैं, जिससे उनका मानना है कि वे किसी प्रकार के धर्मत्याग या बहिष्कार से बच जाएंगे। रयोन ने जोर देकर कहा, हमारे कार्यों में कुछ भी विधर्मी या चर्च विरोधी नहीं है। हमारे लिए विधर्मी होना सबसे बुरी स्थिति है; हम विधर्मी होने से बेहतर मरना पसंद करेंगे।

वर्तमान में यह सोसायटी दुनिया भर के 75 से अधिक देशों में सक्रिय है और इसके पास 750 से अधिक पुजारी तथा लगभग 6,00,000 समर्पित अनुयायी हैं। हालांकि, वैटिकन के लिए पोप की मंजूरी के बिना बिशपों का अभिषेक करना सीधे तौर पर अनुशासनहीनता है, जिसके परिणामस्वरूप संबंधित बिशपों का स्वतः बहिष्कार हो सकता है।