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हिजबुल्लाह के भूमिगत सुरंग को नष्ट किया गया

इजरायली मंत्रियों के संयुक्त बयान से नई जानकारी दी गयी

  • युद्धविराम के बाद की यह कार्रवाई की गयी

  • हिजबुल्लाह हथियार डालने को तैयार नहीं

  • यह सुरंग सीमा से दस किलोमीटर दूर

एजेंसियां

येरूशलमः इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने एक संयुक्त बयान में पुष्टि की है कि इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह की एक बड़ी भूमिगत सुरंग को नष्ट कर दिया है। रविवार को जारी इस आधिकारिक बयान के अनुसार, यह सुरंग मजदल ज़ौन गांव के निकट स्थित थी और हिजबुल्लाह के आतंकवादी बुनियादी ढांचे का एक प्रमुख हिस्सा थी।

इजरायली अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह भूमिगत सुरंग 200 मीटर से अधिक लंबी और 25 मीटर से अधिक गहरी थी। इस सुरंग के भीतर सैकड़ों हथियार और कई ऐसे लॉन्च साइलो पाए गए, जिनका उपयोग इजरायली क्षेत्र पर हमले करने के लिए किया जाना था। सैन्य सूत्रों ने बताया कि यह स्थान इजरायल की सीमा से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित था। इस ऑपरेशन को अंजाम देने से पहले इजरायल ने संयुक्त राज्य अमेरिका को पूर्व में सूचित कर दिया था। स्थानीय लेबनानी निवासियों ने बताया कि विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि आसपास के इलाकों में जमीन हिलने का अनुभव हुआ।

युद्धविराम और अनिश्चित शांति यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब दक्षिणी लेबनान में आधिकारिक संघर्ष विराम और दोनों देशों के बीच एक रूपरेखा समझौते के बावजूद तनाव चरम पर है। शुक्रवार को इजरायल और लेबनान ने दशकों पुराने युद्ध को समाप्त करने और शांति व सुरक्षा की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति व्यक्त की थी।

हालांकि, हिजबुल्लाह इस शांति समझौते को पूरी तरह से नकार रहा है। लेबनानी मिलिशिया (हिजबुल्लाह) इस वार्ता का हिस्सा नहीं था और उसने समझौते के तहत प्रस्तावित निरस्त्रीकरण को दृढ़ता से खारिज कर दिया है। इस समझौते की शर्तों के अनुसार, इजरायल को दक्षिणी लेबनान से पूरी तरह से पीछे हटना है, लेकिन यह तभी संभव होगा जब हिजबुल्लाह जैसे गैर-राज्य समूहों का निरस्त्रीकरण सुनिश्चित हो जाए। समझौते में इजरायली सेना के दो चरणों में धीरे-धीरे पीछे हटने का प्रावधान है, जिसके बाद उन क्षेत्रों का नियंत्रण लेबनानी सेना को सौंप दिया जाएगा। हिजबुल्लाह और तेहरान के नेतृत्व द्वारा इस प्रक्रिया का विरोध किए जाने के कारण क्षेत्र में शांति की राह अभी भी अत्यंत चुनौतीपूर्ण बनी हुई है।