Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
क्या भारत में नागरिकों को हासिल है पूरी आजादी? जानिए संविधान प्रदत्त 11 अधिकारों के साथ जुड़ी अहम का... क्या NDA में होगा बड़ा विस्तार? परिसीमन और महिला आरक्षण बिल के बीच DMK, NCP और अकाली दल के साथ आने क... महाराष्ट्र के सांगली में बड़ा हादसा: रेणावी घाट में दो ST बसों की आमने-सामने भीषण टक्कर स्वतंत्रता दिवस 2026: दिल्ली मेट्रो की विशेष व्यवस्था, लाल किला और जामा मस्जिद के लिए सुबह 4 बजे से ... अयोध्या पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महंत परमहंस रामचंद्र दास के स्मृति समारोह में हुए शामिल 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्र के नाम संबोधन, देशवासि... PM मोदी और विदेश नीति पर टिप्पणी से गरमाई सियासत: राजनाथ सिंह और एकनाथ शिंदे ने राहुल गांधी को घेरा,... CJI सूर्य कांत विवाद के बाद सुर्खियों में NALSAR यूनिवर्सिटी, BCI ने वापस लिया निलंबन फैसला 4,200 करोड़ के लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब 15 अगस्त को देश मनाएगा 80वां स्वतंत्रता दिवस, लाल किले पर समारोह के दौरान मौसम पर टिकीं निगाहें

Ashura in Iran: ईरान में मुहर्रम का मातम; इमाम हुसैन की शहादत को याद कर भावुक हुए लोग

ईरान: इस वर्ष ईरान में मुहर्रम और आशूरा का पर्व पहले से कहीं अधिक भावुकता और गम के माहौल में मनाया गया। फरवरी में हुए अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद यह पहला मुहर्रम था, जिसमें लोगों ने इमाम हुसैन की शहादत के साथ-साथ हालिया युद्ध में मारे गए अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई, सैन्य अधिकारियों और हजारों आम नागरिकों को भी याद किया।

🏴 आशूरा: अन्याय के खिलाफ कुर्बानी का दिन

आशूरा का दिन 680 ईस्वी में हुई कर्बला की जंग की याद में मनाया जाता है। इमाम हुसैन ने यजीद की विशाल सेना के सामने अन्याय के खिलाफ डटकर कुर्बानी दी थी। यही कारण है कि आज भी आशूरा को दुनिया भर में ‘अन्याय और अत्याचार के खिलाफ खड़े होने’ का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। ईरान के शहरों और गांवों में लाखों लोग सड़कों पर उतरे, सीना पीटकर मातम किया और नौहे (शोक गीत) गाकर इमाम की कुर्बानियों को नमन किया।

💧 तासुआ और हजरत अब्बास की याद

आशूरा से एक दिन पहले ‘तासुआ’ मनाया गया, जिसमें इमाम हुसैन के सौतेले भाई हजरत अब्बास को याद किया गया, जो कर्बला में प्यासे बच्चों के लिए पानी लाते हुए शहीद हो गए थे। इस दौरान ईरान के अलावा इराक के पवित्र शहर कर्बला में भी दुनिया भर से लाखों जायरीन पहुंचे और इमाम की दरगाह पर अकीदत के फूल चढ़ाए।

🤲 इंसानियत और सेवा का संदेश

मुहर्रम के दौरान पूरे ईरान में ‘नज़री’ (मुफ्त भोजन) का वितरण किया गया। यह परंपरा इमाम हुसैन की इंसानियत, सेवा और उदारता की सीख को जीवंत रखती है। ज़रूरतमंदों और मातम करने वालों को भोजन कराकर लोगों ने कर्बला की शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया।