Bharat Bhushan Tiwari Encounter: बिहार मानवाधिकार आयोग सख्त; प्रशासन से तलब की रिपोर्ट, पुलिस ने मानी गलती
भोजपुर: बिहार के भोजपुर में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब एक गंभीर मोड़ ले लिया है। बिहार मानवाधिकार आयोग (BHRC) ने इस घटना पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP) और भोजपुर पुलिस अधीक्षक (SP) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। आयोग की इस सक्रियता ने राज्य के प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है।
👮 पुलिस मुख्यालय ने स्वीकार की चूक
मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) सुधांशु कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि 16 जून की कार्रवाई के दौरान हालात को सही ढंग से नहीं संभाला गया। पुलिस मुख्यालय ने इसे एक ‘गंभीर गलती’ मानते हुए कहा है कि इस मामले की जांच निष्पक्ष और वैज्ञानिक तरीके से की जाएगी। फॉरेंसिक लैब की मदद ली जा रही है ताकि गोली चलने की दूरी, हथियार और घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
🏛️ न्यायिक जांच और राजनीतिक हलचल
यह मामला अब एक राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। विपक्ष जहाँ लगातार सीबीआई जांच की मांग कर रहा है, वहीं राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि सरकार इस मामले में पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने न्यायिक जांच के संकेत देते हुए कहा कि एनकाउंटर से जुड़ी प्रत्येक कड़ी, जैसे अवैध हथियार का स्रोत और पुलिस की भूमिका की गहराई से समीक्षा की जाएगी।
🔍 जांच का दायरा बढ़ा
दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता सौरभ तिवारी द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में शिकायत दर्ज कराने के बाद से ही इस एनकाउंटर की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे थे। अब जांच एजेंसियां इन सवालों के जवाब तलाश रही हैं:
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क्या पुलिस कार्रवाई के दौरान नियमावली का पालन हुआ?
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गोलीबारी किस हथियार से और किन परिस्थितियों में हुई?
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मृतक की मानसिक स्थिति और घटनाक्रम में वास्तविक अंतर क्या था?