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Coaching Center Fire Safety: लखनऊ हादसे के बाद दिल्ली के कोचिंग सेंटरों का रियलिटी चेक; दांव पर है हजारों बच्चों की जान

लखनऊ/दिल्ली: लखनऊ के अलीगंज स्थित एक एनीमेशन सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में 15 बच्चों की दर्दनाक मौत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने SIT जांच के आदेश दिए हैं। वहीं, इस घटना ने दिल्ली के उन हजारों कोचिंग सेंटरों और होटलों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जो बिना फायर NOC के नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे हैं।

📉 रियलिटी चेक: कोचिंग सेंटरों का खतरनाक जाल

लखनऊ हादसे के बाद दिल्ली के लक्ष्मी नगर और शकरपुर जैसे कोचिंग हब का रियलिटी चेक किया गया, जहाँ स्थिति बेहद भयावह मिली:

  • संकरी सीढ़ियाँ: ज्यादातर कोचिंग सेंटर ऐसी इमारतों में हैं जहाँ आने-जाने के लिए केवल 1.5 से 2 फीट चौड़ी सीढ़ियाँ हैं।

  • एग्जिट का अभाव: किसी भी हादसे की स्थिति में बाहर निकलने के लिए कोई दूसरा रास्ता नहीं है।

  • बायोमेट्रिक लॉक: शॉर्ट सर्किट की स्थिति में ये लॉक खुद-ब-खुद बंद हो जाते हैं, जिससे अंदर मौजूद छात्रों का बाहर निकलना असंभव हो जाता है।

  • अमानक उपकरण: फायर एक्सटिंग्विशर या तो मौजूद नहीं हैं, या फिर एक्सपायर हो चुके हैं।

⚠️ क्या हम मालवीय नगर हादसे से सबक नहीं ले रहे?

बीते दिनों दिल्ली के मालवीय नगर (हौजरानी) के एक होटल में लगी आग में 24 लोगों की मौत हो गई थी। उस होटल के पास भी फायर NOC नहीं थी और बेसमेंट में नियमों के विरुद्ध निर्माण किया गया था। बायोमेट्रिक गेट लॉक होने के कारण लोग अंदर ही फंस गए और दम घुटने से उनकी मौत हो गई। बावजूद इसके, आज भी दिल्ली में लाखों कोचिंग सेंटर इसी तरह के असुरक्षित वातावरण में चल रहे हैं।

⚖️ 24 मौतों का असली जिम्मेदार कौन?

प्रशासन ऐसे हादसों के बाद कुछ दिनों तक सीलिंग की कार्रवाई का दिखावा करता है, लेकिन फिर सब कुछ पहले जैसा हो जाता है। सवाल यह है कि कोचिंग संचालकों की लापरवाही और प्रशासन की ढिलाई के बीच पिस रहे मासूम बच्चों की सुरक्षा का जिम्मेदार कौन है? क्या केवल दोषियों की गिरफ्तारी काफी है, या हमें एक सख्त ‘फायर ऑडिट’ और जवाबदेही प्रणाली की आवश्यकता है?