Progressive Farmer Palamu: झारखंड के इस दंपती ने पेश की मिसाल; 2 एकड़ आम के बाग से हो रही हजारों की कमाई
पलामू: पलामू जिले के जमुने गांव के किसान राजगोविंद पाल और उनकी पत्नी रीता देवी ने सूखे से प्रभावित इलाकों में खेती की एक नई दिशा दिखाई है। 2022 तक धान और गेहूं की परंपरागत खेती से नुकसान झेलने वाले इस दंपती ने बागवानी अपनाकर न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारी है, बल्कि आसपास के किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत भी बन गए हैं।
💡 प्रेरणा और बदलाव की शुरुआत
राजगोविंद पाल जब छत्तीसगढ़ के रायपुर में बागवानी का भ्रमण करने गए, तो उन्हें आधुनिक खेती की समझ मिली। वापस लौटने पर अपनी पत्नी रीता देवी (जो झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी-JSLPS से जुड़ी हैं) के साथ मिलकर उन्होंने दो एकड़ भूमि पर आम का बाग तैयार किया। उन्होंने बताया कि सिंचाई के अभाव में धान-गेहूं की खेती घाटे का सौदा साबित हो रही थी, लेकिन अब बागवानी से उन्हें अच्छी आमदनी मिल रही है।
🤝 सरकारी योजनाओं का मिला साथ
इस दंपती की सफलता में जेएसएलपीएस और मनरेगा की अहम भूमिका है। पलामू में अब तक कुल 6,967 एकड़ भूमि पर आम की बागवानी की जा चुकी है। जेएसएलपीएस न केवल किसानों को बागवानी के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, बल्कि ‘दीदी बाड़ी योजना’ के माध्यम से सहायता और आम की मार्केटिंग में भी मदद कर रहा है। जेएसएलपीएस की मधुलिका दुबे ने बताया कि किसानों को कम संसाधनों में अधिक लाभ वाली बागवानी की ओर प्रेरित किया जा रहा है।
☀️ पलामू में खेती के लिए चुनौती
पलामू का क्षेत्र अक्सर सूखे की समस्या से ग्रस्त रहता है। 2026 में भी कम बारिश की चेतावनी के बीच, किसानों को कम पानी वाली फसलों और बागवानी के लिए प्रशिक्षित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। पलामू के किसान अब बारिश पर निर्भर रहने के बजाय बागवानी जैसी दीर्घकालिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं, जो सूखे के कठिन समय में भी आय का जरिया बनी हुई है।