समझौता होने के करीब भी कई जरूरी सवालों के उत्तर नहीं
एजेंसियां
दुबईः होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल टैंकरों की आवाजाही फिर से सामान्य होने लगी है। अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए नाकेबंदी को हटाने के बाद यह कदम उठाया गया है, क्योंकि दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्त करने के लिए एक अंतरिम समझौता प्रभावी हो गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा संभालता है, और इस नाकेबंदी के हटने का सीधा प्रभाव वैश्विक बाजारों पर पड़ा है। तेल की कीमतें 2 मार्च के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई हैं, क्योंकि विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में इस महत्वपूर्ण मार्ग से निर्यात पूरी तरह से बहाल हो जाएगा।
समझौते की अनिश्चितता और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं हालाँकि, यह समझौता शांति की पूर्ण गारंटी नहीं देता है। लेबनान में हिज़बुल्लाह के खिलाफ इज़राइल का युद्ध जारी है, जिसने इस अंतरराष्ट्रीय समझौते की स्थिरता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। वाशिंगटन में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के रिपब्लिकन सहयोगियों ने भी इस सौदे की आलोचना की है। उनका तर्क है कि अमेरिकी मतदाताओं के बीच युद्ध की अलोकप्रियता के कारण राष्ट्रपति ने इस समझौते में अत्यधिक रियायतें दी हैं।
दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने इस समझौते को ट्रम्प की निराशा का परिणाम बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि भविष्य में होने वाली परमाणु कार्यक्रम संबंधी वार्ताएं सरल नहीं होंगी। खामेनेई ने अपने लिखित संदेश में दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि अमेरिकी पक्ष बहुत अधिक मांगें रखेगा, तो ईरान उन्हें स्वीकार नहीं करेगा।
अगले 60 दिन: कूटनीतिक परीक्षा का समय इस समझौते के तहत वार्ताकारों को ईरान के परमाणु कार्यक्रम की स्थिति पर आम सहमति बनाने के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है। इसके अलावा, समझौते में ईरान और प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के लिए 300 बिलियन डॉलर का फंड बनाने और अन्य वित्तीय प्रोत्साहन देने का प्रावधान है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका का ध्यान अब तेहरान की लंबी दूरी की मिसाइलों को सीमित करने पर केंद्रित होगा।
गौरतलब है कि लगभग चार महीने पहले जब राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस युद्ध की शुरुआत की थी, तो उनका घोषित लक्ष्य ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम को नष्ट करना, पड़ोसी देशों पर हमले की उसकी क्षमता को खत्म करना और क्षेत्र में उसके सहयोगी उग्रवादी गुटों के समर्थन को रोकना था। साथ ही, उनका उद्देश्य ईरान के कट्टरपंथी नेतृत्व को अस्थिर करना भी था। अब, इस अंतरिम समझौते के साथ यह देखना शेष है कि क्या ये कूटनीतिक प्रयास क्षेत्र में स्थायी शांति ला पाएंगे या ये मात्र युद्ध विराम तक ही सीमित रहेंगे।