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सूखे का समाधान समुद्र में खोजता मोरक्को

भीषण जलसंकट से जूझते अफ्रीकी देशों के लिए मॉडल

  • जलवायु परिवर्तन अब स्थायी रुप ले चुका

  • 2030 के लक्ष्य पर काम कर रहा यह देश

  • अब सिर्फ बारिश पर निर्भर नहीं रहेंगे

एजेंसियां

रबातः वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन के कारण पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। दुनिया तेजी से जल दिवालियापन के दौर में प्रवेश कर रही है, जहां मीठे पानी के पारंपरिक स्रोत तेजी से खत्म हो रहे हैं। इस झुलसाते और सूखे भविष्य से तालमेल बिठाने के लिए दुनिया भर के शहरों और खेतों को अब एक नए विकल्प पर निर्भर होना पड़ रहा है—और वह विकल्प है विप्रलवणीकरण, यानी समुद्र के खारे पानी को पीने योग्य मीठे पानी में बदलना।

इस तकनीक का दायरा वैश्विक स्तर पर बहुत तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2024 तक के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में 22,000 से अधिक विप्रलवणीकरण संयंत्र काम कर रहे थे। इनमें से अधिकांश संयंत्र मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में स्थित हैं, जिन्हें दुनिया का सबसे गंभीर जल-अभाव वाला क्षेत्र माना जाता है। पानी की इस भीषण किल्लत से निपटने के लिए अब कई अन्य अफ्रीकी देश भी इस आधुनिक तकनीक पर बड़ा दांव लगा रहे हैं। मोरक्को इस मुहिम में सबसे आगे है, जिसने लक्ष्य रखा है कि वर्ष 2030 तक वह अपनी पीने के पानी की कुल आवश्यकता का 60 फीसद हिस्सा सीधे समुद्र से हासिल करेगा।

हाल ही में, जनवरी में भारी सर्दियों की बारिश के बाद मोरक्को ने अपने यहाँ सात साल से चले आ रहे ऐतिहासिक सूखे के अंत की घोषणा की थी। इस बारिश से उन जलाशयों और बांधों का जलस्तर फिर से बढ़ गया जो रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच चुके थे। हालांकि, इस अस्थायी राहत के बावजूद मोरक्को सरकार ने अपनी दीर्घकालिक रणनीति में कोई बदलाव नहीं किया है। देश यह भली-भांति जानता है कि बारिश पर पूरी तरह निर्भर रहना अब सुरक्षित नहीं है, इसलिए वे समुद्र के पानी को शुद्ध करने के अपने बुनियादी ढांचे को लगातार मजबूत कर रहे हैं ताकि भविष्य के संकटों से निपटा जा सके।

जलवायु परिवर्तन के इस दौर में अब केवल बारिश और बांधों के भरोसे रहना व्यावहारिक नहीं रह गया है। मोरक्को के उपकरण और जल मंत्री, निज़ार बराका ने इस कड़वी सच्चाई को स्वीकार करते हुए कहा, केवल वर्षा और बांधों में पानी की आवक पर निर्भर रहना अब पर्याप्त नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सूखा अब कोई असाधारण या अस्थायी घटना नहीं रह गया है, बल्कि हम जो देख रहे हैं वह वास्तव में हमारे जलवायु चक्र का एक संरचनात्मक और स्थायी बदलाव है।

विप्रलवणीकरण के इस ऊंचे खर्च और तकनीकी चुनौती के बावजूद मोरक्को इस दिशा में एक राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है। इस रणनीति का नेतृत्व कैसाब्लांका से लगभग 25 मील दक्षिण में निर्माणाधीन एक विशाल 650 मिलियन डॉलर (65 करोड़ डॉलर) का प्रोजेक्ट कर रहा है। यह न केवल अफ्रीका का सबसे बड़ा विप्रलवणीकरण संयंत्र होगा, बल्कि इसके डेवलपर्स के अनुसार, यह पूरी तरह से नवीकरणीय ऊर्जा से संचालित होने वाला दुनिया का सबसे बड़ा संयंत्र भी होगा। इस विशाल संयंत्र को चलाने के लिए आवश्यक बिजली, पश्चिमी सहारा के विवादित क्षेत्र में स्थित 360-मेगावाट के एक पवन फार्म से हासिल की जाएगी।