Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
नॉर्ड गैस स्ट्रीम पाइपलाइन पर हमले में कार्रवाई मछली पकड़ने वाली चीनी जहाजों का बेड़ा मौजूद उग्र भीड़ ने इबोला उपचार केंद्र को फूंका दिया Maharashtra Rain Havoc: महाराष्ट्र में बारिश बनी काल, लापरवाही के चलते 9 लोगों की दर्दनाक मौत; जानें... अब वेनेजुएला भूकंप में बचने वालों की उम्मीद कम How to Get Glass Hair: कोरियन हेयर केयर रूटीन से पाएं स्मूथ, शाइनी और हेल्दी बाल; जानें आसान तरीका Women's T20 World Cup 2026 Final: ऑस्ट्रेलिया बनाम इंग्लैंड के बीच खिताबी जंग, जानें विजेता टीम को म... Bollywood News: अक्षय कुमार की कमाई का नया जरिया, मुंबई में करोड़ों की प्रॉपर्टी बेचकर कमाए भारी मुना... Mental Health Crisis: युद्ध के मैदान से लौटे सैनिकों में PTSD का खतरा, इजराइल में 1 लाख तक पहुंच सकत... Crude Oil Prices: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का पेट्रोल-डीजल पर असर, सरकार ने साफ की स्थिति

बंगाल सीआईडी ने अभिषेक बनर्जी से की पूछताछ

पिछली तीन बार किसी किसी बहाने से नहीं आये थे वह

राष्ट्रीय खबर

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी गुरुवार को पश्चिम बंगाल पुलिस के आपराधिक जांच विभाग के समक्ष पेश हुए। सीआईडी ​​के अधिकारियों ने कोलकाता के भवानी भवन स्थित मुख्यालय में विधानसभा में विधायकों के फर्जी हस्ताक्षर से जुड़े एक हाई-प्रोफाइल मामले में उनसे लगभग छह घंटे तक गहन पूछताछ की। इससे पहले, अभिषेक बनर्जी अस्वस्थता और कानूनी प्रक्रियाओं का हवाला देकर तीन बार सीआईडी के समन पर पेश नहीं हुए थे।

अभिषेक बनर्जी की यह पेशी कलकत्ता उच्च न्यायालय के कड़े निर्देश के बाद हुई। न्यायालय ने उन्हें गुरुवार शाम 6 बजे तक हर हाल में सीआईडी के सामने उपस्थित होने का आदेश दिया था। हालांकि, कोर्ट ने राहत देते हुए उन्हें तीन सप्ताह के लिए दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा भी प्रदान की है, बशर्ते वह जांच में पूरा सहयोग करें। दिल्ली से कोलकाता लौटते ही अभिषेक बनर्जी शाम करीब 5:50 बजे भारी सुरक्षा घेरे के बीच भवानी भवन पहुंचे।

यह पूरा विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और अन्य प्रमुख पदों के चयन के लिए सौंपे गए एक प्रस्ताव से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए इस प्रस्ताव पत्र में कई विधायकों के जाली हस्ताक्षर शामिल थे। टीएमसी के ही दो बागी और निष्कासित विधायकों—ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा—ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 6 मई की बैठक में ऐसा कोई प्रस्ताव पारित ही नहीं हुआ था और उनके हस्ताक्षर ब्लॉक अक्षरों में जालसाजी कर बनाए गए हैं। इसी मामले में शिकायत के बाद हरे स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसे बाद में सीआईडी ने अपने हाथ में ले लिया।

जांच अधिकारियों ने अभिषेक बनर्जी से इस मूल प्रस्ताव पुस्तिका और उपस्थिति रजिस्टर के बारे में विस्तार से सवाल-जवाब किए। इससे पहले सीआईडी ने इस दस्तावेज की तलाश में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास के पास स्थित पार्टी कार्यालय की भी तलाशी ली थी। सूत्रों के अनुसार, जांच दल अभिषेक बनर्जी के कई जवाबों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं है, जिसके चलते उन्हें आगामी 14 जून को दोबारा दोपहर 12 बजे पूछताछ के लिए तलब किया गया है। यह कानूनी संकट ऐसे समय आया है जब पार्टी के भीतर भी इस विवाद को लेकर अंदरूनी मतभेद उभर रहे हैं।