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मॉनसून की पहली बारिश में कासरगोड का गांव प्रभावित

एन एच 66 की वजह से कीचड़ में डूबा गांव

  • थोड़े समय के लिए सड़क जाम हुआ

  • सारा इलाका में घुटना तक कीचड़

  • हाई वे निर्माण की मिट्टी बहकर आयी

राष्ट्रीय खबर

तिरुअनंतपुरमः केरल के कासरगोड जिले में चेंगला पंचायत के बेविंजा और कुंडाडुक्कम गांव के निवासी इन दिनों भीषण संकट का सामना कर रहे हैं। पिछले दो दिनों से हो रही भारी बारिश के कारण निर्माणाधीन एनएच-66 की ऊंचाई से बहकर आई मिट्टी और मलबे ने गांव को पूरी तरह से कीचड़ में तब्दील कर दिया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि ग्रामीण अपने ही घरों में कैद होकर रह गए हैं और गांव से बाहर जाने वाली एकमात्र सड़क लाल कीचड़ की नदी बन गई है।

आक्रोशित ग्रामीणों ने एनएच-66 को जाम कर अपना विरोध दर्ज कराया। हालांकि, स्कूली बच्चों की असुविधा को देखते हुए यह प्रदर्शन जल्द ही समाप्त कर दिया गया, लेकिन ग्रामीणों का दर्द कम नहीं हुआ है। चेंगला पंचायत सदस्य जयाकुमारी के. ने बताया कि उनके वार्ड के बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, क्योंकि घर से बाहर निकलना असंभव हो गया है। एक निर्माण श्रमिक बाबू ने बताया, मेरे बच्चे छठी कक्षा और आंगनवाड़ी में हैं, लेकिन कीचड़ और वाहनों के न पहुंच पाने के कारण उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है।

गांव की स्थिति किसी आपदा से कम नहीं है। ग्रामीणों के आंगन, इंटरलॉकिंग टाइलें और धान के खेत घुटनों तक गहरी मिट्टी और गाद के नीचे दब गए हैं। कुओं का पानी मटमैला हो चुका है और गांव की मुख्य सड़क मलबे के नीचे लुप्त हो गई है। स्थानीय निवासी अरुण सी.एस. का कहना है कि यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि मानव निर्मित त्रासदी है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाईवे निर्माण शुरू होने के बाद से यह लगातार चौथा मानसून है जब वे इस दुर्दशा को झेल रहे हैं।

इस समस्या की जड़ चेरकाला में है, जहाँ हैदराबाद स्थित मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड छह-लेन वाले राष्ट्रीय राजमार्ग के एक एलिवेटेड स्ट्रेच का निर्माण कर रही है। निवासियों का आरोप है कि पिलर और तटबंधों के लिए खोदी गई भारी मात्रा में मिट्टी को बिना किसी सुरक्षात्मक उपाय के खुला छोड़ दिया गया है। भारी बारिश के दौरान यह मिट्टी ढलान से नीचे बहकर गांवों में आ गई, जिससे 40 से अधिक घर, कृषि भूमि और पीने के पानी के स्रोत प्रभावित हुए हैं। ग्रामीण अब अधिकारियों की ओर से त्वरित समाधान और उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं।