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खुफिया अधिकारी को आजीवन कारावास की सजा

बहरीन में हिरासत में हुई मौत के मामले में अदालती फैसला

  • मृतक को गंभीर चोट लगी थी

  • अप्रैल में ही दर्ज हुआ था मामला

  • मानवाधिकार समूहों ने निंदा की थी

एजेंसियां

मनामाः बहरीन की एक अदालत ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण और दुर्लभ निर्णय सुनाते हुए देश की घरेलू खुफिया एजेंसी (नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस) के एक अधिकारी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह सजा हिरासत के दौरान एक व्यक्ति की मौत के मामले में दी गई है। यह गिरफ्तारी उस समय के दौरान की गई थी जब क्षेत्र में ईरान के साथ तनाव चरम पर था।

बहरीन की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, यह फैसला विस्तृत जांच के बाद आया है, जिसमें यह निष्कर्ष निकला कि खुफिया एजेंसी का वह अधिकारी उस व्यक्ति की मौत के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार था। सरकारी अभियोजकों ने अप्रैल में ही अधिकारी के खिलाफ हमला करने और उसके परिणामस्वरूप मृत्यु जैसे गंभीर आरोप दायर किए थे। हालांकि, सरकारी अभियोजन पक्ष की विशेष जांच इकाई ने मृतक का नाम आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया है।

किंतु, घटना की तारीख और परिस्थितियों का मिलान मोहम्मद अल-मौसावी के मामले से होता है। 32 वर्षीय शिया मुस्लिम अल-मौसावी की मृत्यु के बाद, जब उनके शव को परिवार को सौंपा गया था, तो उनके शरीर पर चोट, जलने के निशान और गहरे घाव पाए गए थे। मोर्चरी और अंतिम संस्कार में शामिल प्रत्यक्षदर्शियों ने भी इसी बात की पुष्टि की थी। फिजिशियन्स फॉर ह्यूमन राइट्स के एक फोरेंसिक विशेषज्ञ ने बताया कि अल-मौसावी के शरीर पर मौजूद चोटें स्पष्ट रूप से भीषण आघात के उपयोग और क्रूर यातना की ओर संकेत करती हैं।

अल-मौसावी उन दर्जनों लोगों में शामिल थे जिन्हें ईरान समर्थित विरोध प्रदर्शनों या जासूसी के आरोपों में युद्ध के दौरान हिरासत में लिया गया था। यह वह समय था जब ईरानी मिसाइलें बहरीन की ओर दागी जा रही थीं। सुन्नी शासकों वाले इस शिया-बहुसंख्यक द्वीप राष्ट्र में अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा भी तैनात है। बहरीन सरकार ने अक्सर प्रदर्शनकारियों को ईरानी प्रतिनिधि बताकर उन पर कार्रवाई की है।

इस घटना के बाद से ही मानवाधिकार समूहों ने गिरफ्तारी अभियान की कड़ी निंदा की थी। मंगलवार को आए फैसले के बाद, बहरीन इंस्टीट्यूट फॉर राइट्स एंड डेमोक्रेसी ने आजीवन कारावास की सजा को अपर्याप्त करार दिया है। संगठन ने मांग की है कि दोषी अधिकारी की पहचान उजागर की जाए और अल-मौसावी की मौत से जुड़ी परिस्थितियों में अधिक पारदर्शिता लाई जाए। इसके विपरीत, बहरीन सरकार ने हमेशा से किसी भी प्रकार के सांप्रदायिकता के आरोपों को नकारा है। सरकार का दावा है कि प्रशासन ने कानून के दायरे में रहकर काम किया है और दुर्व्यवहार के किसी भी आरोप की जांच स्वतंत्र निकायों द्वारा की जाती है।