बेंजामिन नेतन्याहू ने अपनी पसंद के व्यक्ति को बैठाया
एजेंसियां
यरूशलेमः तमाम विवादों और कानूनी चुनौतियों के बीच, रोमन गोफमैन ने आधिकारिक तौर पर इजराइल की विदेशी खुफिया एजेंसी मोसाद के प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा नामित किए जाने के बाद, गोफमैन की नियुक्ति को इजराइल के सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसे सोमवार को न्यायाधीशों ने खारिज कर दिया। इसके तुरंत बाद एक औपचारिक समारोह में उन्हें पद की शपथ दिलाई गई। वे निवर्तमान प्रमुख डेविड बार्निया का स्थान लेंगे। इजराइली मीडिया की खबरों के अनुसार, बार्निया ने स्वयं भी इस नियुक्ति का विरोध किया था।
रोमन गोफमैन की नियुक्ति के खिलाफ कानूनी चुनौती का केंद्र वर्ष 2022 की एक घटना थी, जब वे इजराइली सेना में एक डिवीजन की कमान संभाल रहे थे। अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, उस दौरान गोफमैन की जानकारी और सहमति से एक अधिकारी ने एक सैनिक को संवेदनशील सुरक्षा संबंधी जानकारी दी थी, जिसे बाद में एक टेलीग्राम चैनल पर सार्वजनिक कर दिया गया। घटना के समय वह सैनिक मात्र 17 वर्ष का था, जिसे बाद में इन जानकारियों को लीक करने के आरोप में डेढ़ साल तक हिरासत और हाउस अरेस्ट में रहना पड़ा था।
यद्यपि इजराइली सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने इस मामले में गोफमैन की गलतियों को स्वीकार किया, लेकिन उन्होंने यह भी माना कि ये गलतियां ऐसी नहीं हैं जो नैतिक आचरण के मानकों का उल्लंघन करती हों या उन्हें मोसाद प्रमुख के रूप में सेवा करने से अयोग्य ठहराती हों।
गोफमैन की नियुक्ति पर व्यापक असंतोष भी देखा जा रहा है। इसका मुख्य कारण यह है कि अपने पूर्ववर्तियों के विपरीत, गोफमैन मोसाद के आंतरिक कैडर से नहीं आते हैं, बल्कि उनका पृष्ठभूमि सैन्य और प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़ी रही है। बेलारूस में जन्मे गोफमैन, बेंजामिन नेतन्याहू के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। आलोचकों का आरोप है कि उन्हें मोसाद प्रमुख के रूप में उनकी विशेषज्ञता के बजाय, प्रधानमंत्री के प्रति उनकी अटूट वफादारी के कारण चुना गया है।
मंगलवार को नियुक्ति समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि गोफमैन का मुख्य मिशन ईरान की आक्रामकता के खिलाफ मोसाद के संघर्ष का नेतृत्व करना होगा। आधिकारिक रूप से इंस्टीट्यूट फॉर इंटेलिजेंस एंड स्पेशल ऑपरेशंस के नाम से जानी जाने वाली मोसाद को दुनिया की सबसे प्रभावी खुफिया एजेंसियों में गिना जाता है। इस एजेंसी को कई साहसिक और रहस्यमयी ऑपरेशनों का श्रेय दिया जाता है, हालांकि इसके तौर-तरीकों ने अक्सर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचनाओं को भी जन्म दिया है।